मंगलवार 16 जून 2026 - 17:01
यज़ीद ने अपने छोटे से ख़िलाफ़त काल में कौन-कौन से बड़े अपराध किए?

यज़ीद ने अपने छोटे से ख़िलाफ़त काल में ऐसे अपराध किए, जिनमें से प्रत्येक अकेला ही उसके और उसके वंश की बदनामी और कलंक के लिए पर्याप्त है। इमाम हुसैन (अ.) और उनके साथियों की शहादत तथा नबवी परिवार की महिलाओं और बच्चों को बंदी बनाना, सबसे बड़ा अपराध था जो यज़ीद के आदेश पर हुआ। इसके बाद “वाक़ेआ-ए-हुर्रा” घटित हुआ, जिसमें यज़ीद की सेना ने तीन दिन तक मदीना के लोगों की हत्या और लूटपाट की। इसके बाद यज़ीद की सेना अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर से युद्ध के लिए मक्का की ओर गई और उन्होंने अल्लाह के घर (काबा) पर मंजनिक से आग बरसाई, जिसके परिणामस्वरूप काबा के पर्दे और छत जल गए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, निम्न प्रश्नोत्तर में “यज़ीद के संक्षिप्त ख़िलाफ़त काल के अपराध” पर चर्चा की गई है, जो पाठकों के लिए प्रस्तुत है।

प्रश्न: यज़ीद ने अपने छोटे से ख़िलाफ़त काल में कौन-कौन से बड़े अपराध किए?

संक्षिप्त उत्तर:
यज़ीद ने अपने थोड़े से ख़िलाफ़त काल में ऐसे बड़े अपराध किए, जिनमें से प्रत्येक अकेला ही उसके और उसके वंश की बदनामी के लिए पर्याप्त है। इमाम हुसैन (अ.) और उनके साथियों की शहादत तथा नबवी परिवार की महिलाओं और बच्चों को बंदी बनाना सबसे बड़ा अपराध था जो उसके आदेश से हुआ। इसके बाद “वाक़ेआ-ए-हुर्रा” हुआ, जिसमें उसकी सेना ने तीन दिन तक मदीना में हत्या और लूटपाट की। फिर उसकी सेना मक्का की ओर बढ़ी और उन्होंने अल्लाह के घर पर मंजनिक से हमला किया, जिससे काबा के पर्दे और छत जल गए।

विस्तृत उत्तर:

यज़ीद ने अपने लगभग तीन वर्ष और कुछ महीनों के छोटे से शासनकाल में बड़े-बड़े अपराध किए, जिनमें से हर एक उसके लिए अपमान और कलंक का कारण है। इनमें से तीन प्रमुख अपराधों का उल्लेख किया जाता है:

  1. कर्बला की दुखद घटना:
    यज़ीद के शासन के आरंभ में ही सबसे बड़ा अपराध कर्बला की घटना (61 हिजरी) थी, जिसमें इमाम हुसैन (अ) और उनके वफ़ादार साथियों की शहादत हुई तथा नबी (स) के परिवार की महिलाओं और बच्चों को बंदी बनाकर ले जाया गया। यह सब उसके एजेंटों द्वारा किया गया।

यज़ीद ने शुरुआत में ही मदीना के गवर्नर वलीद बिन उत्बा को पत्र लिखकर आदेश दिया कि वह किसी भी कीमत पर इमाम हुसैन (अ), अब्दुल्लाह बिन उमर और अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर से बैअत ले।

इब्न असम के अनुसार, जब यज़ीद को इमाम हुसैन (अ) और इब्न ज़ुबैर के इनकार का पता चला तो उसने दूसरा पत्र लिखा और आदेश दिया कि यदि हुसैन (अ.) बैअत न करें तो उनका सिर भेज दिया जाए।

इमाम (अ) के इनकार और मक्का व कूफ़ा की ओर प्रस्थान के बाद अंततः मामला कर्बला की त्रासदी पर समाप्त हुआ।

  1. मदीना के लोगों का नरसंहार:
    यह घटना 63 हिजरी में हुई और “वाक़ेआ-ए-हुर्रा” के नाम से प्रसिद्ध है। कर्बला के बाद जब लोगों को यज़ीद की सच्चाई का पता चला, तो मदीना में विद्रोह हुआ।

मदीना के लोगों ने यज़ीद को ख़िलाफ़त से हटा दिया और उसके गवर्नर को शहर से निकाल दिया। इसके बाद यज़ीद ने एक बड़ी सेना भेजी, जिसकी कमान एक क्रूर व्यक्ति मुस्लिम बिन उक़बा को दी गई।

उसने मदीना को घेरकर तीन दिन तक सेना को शहर में हत्या, लूट और अत्याचार की खुली छूट दे दी। हज़ारों लोग मारे गए और संपत्ति लूट ली गई।

  1. काबा को आग लगाना:
    मदीना की तबाही के बाद यज़ीद की सेना मक्का की ओर बढ़ी, जहाँ अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर शरण लिए हुए थे। रास्ते में मुस्लिम बिन उक़बा की मृत्यु हो गई और उसके बाद हुसैन बिन नुमैर को सेना का नेता बनाया गया।

शाम की सेना ने मक्का का घेराव किया और मस्जिदुल हराम में मौजूद इब्न ज़ुबैर पर हमला किया। उन्होंने मंजनिक से काबा पर आग बरसाई, जिससे काबा के पर्दे और छत जल गई।

इतिहास के अनुसार यह घटना 3 रबीउल अव्वल 64 हिजरी में हुई।

मदीना की घेराबंदी और मक्का पर हमला यज़ीद की मृत्यु की खबर आने तक जारी रहा, जिसके बाद उसकी सेना वापस लौट गई।

इस प्रकार यज़ीद ने अपने हर वर्ष में एक बड़ा अपराध किया और मुसलमानों की जान, माल और सम्मान पर अत्याचार किया। सबसे बड़ा अपराध 61 हिजरी का कर्बला था।

अंत में एक प्रसिद्ध सुन्नी विद्वान ज़हबी का कथन उद्धृत किया गया है, जिसमें उन्होंने यज़ीद को कठोर, बदमिज़ाज, शराब पीने वाला और पापों में लिप्त व्यक्ति बताया है, जिसका शासन कर्बला से शुरू हुआ और हुर्रा की घटना पर समाप्त हुआ।

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