गुरुवार 18 जून 2026 - 07:27
इमामत का अक़ीदा, तौहीद और नुबुव्वत के अक़ीदे का तकमेला "पूरक" है; क़यामत के दिन हर इंसान को उसके इमाम के साथ बुलाया जाएगा: अल्लामा शहनशाह हुसैन नक़वी

कराची के नश्तर पार्क में अशरा-ए-मुहर्रमुल हराम की पहली केंद्रीय मजलिस-ए-अज़ा को संबोधित करते हुए अल्लामा सैयद शहनशाह हुसैन नक़वी ने कहा कि इमामत का अक़ीदा, तौहीद और नुबुव्वत के अक़ीदे का तकमला है तथा क़ियामत के दिन हर इंसान अपने इमाम के साथ उठाया और बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्बला एक वैश्विक और शाश्वत आंदोलन है, जो दुनिया के अंत तक मानवता को सत्य, न्याय और स्वतंत्रता का संदेश देता रहेगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कराची में पाक मुहर्रम एसोसिएशन रजिस्टर्ड के तत्वावधान में निश्तर पार्क में अशरा-ए-मुहर्रमुल हराम की पहली केंद्रीय मजलिस-ए-अज़ा आयोजित की गई। इस अवसर पर पाकिस्तान के प्रसिद्ध वक्ता अल्लामा सय्यद शहनशाह हुसैन नक़वी ने अपने संबोधन में कहा कि इमामत का अक़ीदा, तौहीद और नुबुव्वत के अक़ीदे का तकमेला है, क्योंकि क़ुरआन करीम के अनुसार इमामत अल्लाह तआला द्वारा प्रदान किया गया एक दिव्य पद है। उन्होंने कहा कि इमामत केवल मनुष्य की वैचारिक और बौद्धिक शिक्षा का माध्यम ही नहीं, बल्कि एक आदर्श समाज के निर्माण, मानवता के मार्गदर्शन और उसकी सुरक्षा की भी गारंटी है।

उन्होंने सूर ए इसरा की आयत 71 और 72 को अपने भाषण का आधार बनाते हुए कहा कि क़ुरआन स्पष्ट रूप से घोषणा करता है कि क़ियामत के दिन प्रत्येक व्यक्ति को उसके इमाम के साथ बुलाया जाएगा। इससे इमामत के महत्व और मानव मुक्ति में उसकी मूलभूत भूमिका का अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि क़ुरआन करीम में तौहीद, नुबुव्वत और इमामत से संबंधित अनेक आयतें मौजूद हैं, जो सत्य की खोज करने वालों का मार्गदर्शन करती हैं।

शहनशाह हुसैन नक़वी ने कहा कि जिस प्रकार पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम) समस्त इंसानों और जिन्नों के लिए रसूल बनाकर भेजे गए थे, उसी प्रकार हज़रत अली (अ) से लेकर इमाम महदी (अ) तक सभी आइम्मा-ए-अहलेबैत पूरी मानवता तथा समस्त जिन्नों और इंसानों के इमाम हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रसूल-ए-अकरम (स) के मुबारक अस्तित्व से समस्त सृष्टि लाभान्वित हुई, उसी प्रकार अहलेबैत के इमामों की कृपाएँ और आशीर्वाद दुनिया के अंत तक जारी रहेंगे।

उन्होंने कर्बला की विश्वव्यापी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्बला एक सार्वभौमिक और शाश्वत आंदोलन है, जो हर युग में मानवता को सत्य, न्याय और स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाता है। यदि कोई व्यक्ति सम्मानजनक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीना चाहता है, तो उसे उन महान व्यक्तित्वों से जुड़ना होगा जो कभी नहीं मरते। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया में इमाम हुसैन (अ) की याद में आयोजित होने वाले विशाल आयोजन इस तथ्य का स्पष्ट प्रमाण हैं कि कर्बला का संदेश आज भी जीवित और प्रभावशाली है।

इमामत का अक़ीदा, तौहीद और नुबुव्वत के अक़ीदे का तकमेला "पूरक" है; क़यामत के दिन हर इंसान को उसके इमाम के साथ बुलाया जाएगा: अल्लामा शहनशाह हुसैन नक़वी

इसके बाद उन्होंने अल्लामा इक़बाल का यह प्रसिद्ध शेर पढ़ा—

“हक़ीक़त-ए-अबदी है मक़ाम-ए-शबीरी,

बदलते रहते हैं अंदाज़-ए-कूफ़ी व शामी।”

अल्लामा नक़वी ने कहा कि कर्बला उच्च मानवीय मूल्यों, न्याय, स्वतंत्रता और दीन-ए-इस्लाम की रक्षा का केंद्र है। मुहर्रमुल हराम का आरंभ हमें यह याद दिलाता है कि हम इमाम हुसैन (अ) के ग़म और उनके महान मिशन से जुड़कर दीन-ए-इस्लाम की मजबूती तथा समाज के सुधार के लिए अपना योगदान दें।

मजलिस के अंत में उन्होंने इमाम हुसैन (अ) और शोहदाए कर्बला की पीड़ाओं और बलिदानों का वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित लोग भावुक होकर अश्रुपूर्ण हो गए। इसके बाद नौहाख़्वानी और अज़ादारी का सिलसिला जारी रहा और मजलिस अत्यंत भावुक वातावरण में संपन्न हुई।

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