हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कुम अल-मुकद्दस / सक़लैन फाउंडेशन क़ुम के ज़ेरे एहतेमाम मदरसा ए इल्मिया सक़लैन मे अशरा ए मोहर्रमुल हराम 1443/2021 के हवाले से मजलिस ए इमाम हुसैन (अ.स.) का आयोजन किया गया।
विवरण के अनुसार, दैनिक शोक समारोह (मजलिस ए अज़ा) पवित्र कुरान के पाठ के साथ शुरू होती और उसके बाद शायर इमाम (अ) की खिदमत मे मरसिया पेश करते। मुहर्रमुल हराम के अशरे के खतीब मदरसा ए सक़लैन के अभिभावक मौलान औन मुहम्मद नक़वी थे। मौलाना का मौजूअ "करबाला तजल्ली गाहे इश्क़" था।
जिसमें खतीब मोहतर्मा ने इस विषय को बेहतरीन तरीके से समझाया और कर्बला और प्रेम के संदर्भ में एक नई, आधुनिक और वैज्ञानिक और शोध शैली में कर्बला की व्याख्या की। उन्होंने शिलालेखों को सुनाया और जोर देकर कहा कि इस तरह के आदेश केवल कर्बला के इतिहास में पाए जाते हैं और वे प्रेम के साये में ही सुनाया जा सकता है।
आदरणीय खतीब ने मजलिस-ए-उशरा मुहर्रम-उल-हरम की उपाधि को इमाम-उल-कलाम अमीर-उल-मोमिनीन अली इब्न अबी तालिब (अ.स.) के शब्द के रूप में घोषित किया जिसमें इमाम अली (अ.स.) ) कर्बला के बारे में कहा कि यह जगह इतनी है कि न तो पूर्व और न ही बाद वाले इस स्थिति को प्राप्त कर सकते हैं।
क़ुम के मदरसा के छात्र बड़ी संख्या में मजलिस में शामिल होते थे और मजलिस मे जियारत ए आशूरा पढ़ी जाती थी और मजलिस के बाद, नियाज़ इमाम हुसैन (अ) को अज़ादारो में वितरित किया जाता था।
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