मंगलवार 30 जून 2026 - 22:03
 हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम शहीद नेता के ज़ायरों की सेवा के लिए पूरी तरह तैयार रहें

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मलिकी ने कहा कि हौज़ा-ए-इल्मिया को "शहीद नेता" के अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा में आने वाले ज़ायरों की मेज़बानी के लिए हर स्तर पर तैयार रहना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ज़ायरों की सेवा के लिए मदरसों की सभी सुविधाओं, जैसे आवास, नमाज़गाहों, पुस्तकालयों तथा अन्य शैक्षणिक परिसरों का पूरा उपयोग किया जाए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम के उप प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मलेकी ने क़ुम प्रांत के हौज़ों के ज़िम्मेदारों की बैठक में कहा कि वर्तमान विशेष परिस्थितियों और "शहीद नेता" के पवित्र पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा के आयोजन को देखते हुए यह घटना समकालीन इतिहास की सबसे दुर्लभ घटनाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि इस महान व्यक्तित्व की शहादत उस समय हुई जब वे रोज़े की हालत में पवित्र क़ुरआन का पाठ कर रहे थे। यह अत्यंत प्रभावशाली घटना है, जिसने जनता के भीतर एक विशाल जनभावना उत्पन्न की है। यह जनजागरण लोगों की धार्मिक आस्था और ईमान से प्रेरित है, न कि किसी राजनीतिक या दलगत निष्ठा से।

उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों के दौरान जनता की व्यापक और निरंतर भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि उम्मत की जागृति का अल्लाह का वादा पूरा हो रहा है। इस अवधि में लोगों ने मैदान नहीं छोड़ा और प्रत्येक व्यक्ति ने अपनी क्षमता के अनुसार अपने विचारों और मूल्यों की रक्षा के लिए योगदान दिया। आज हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम इस महान जनसमर्थन की हर संभव रक्षा करें।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मलेकी ने अंतिम यात्रा के अवसर पर क़ुम में लाखों ज़ायरों के आने की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न अधिकारियों के अनुमान के अनुसार क़ुम में कई मिलियन ज़ायरों के आने की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में जनता और हौज़ा संस्थानों की व्यापक भागीदारी के बिना उचित सेवाएँ उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा।

उन्होंने हौज़ा-ए-इल्मिया के ज़िम्मेदारों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी पहली ज़िम्मेदारी ज़ायरों के ठहरने की उचित व्यवस्था करना है। जिस प्रकार आम लोग अपने घर मेहमानों के लिए खोल देते हैं, उसी प्रकार हौज़ा-ए-इल्मिया को भी अपनी पूरी क्षमता के साथ ज़ायरों की सेवा के लिए आगे आना चाहिए। मदरसों का कोई भी भाग—चाहे वह छात्रावास के कमरे हों, नमाज़गाहें, पुस्तकालय, प्रांगण या अन्य उपयोगी स्थान—खाली नहीं रहना चाहिए।

हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम के उप प्रमुख ने बताया कि पूरे देश से मुबल्लेग़ीन के क़ाफ़िलों के क़ुम आने की योजना बनाई गई है। अनुमान है कि कम से कम 20 हज़ार मुबल्लिग़ ज़ायर क़ुम आएँगे, जिनके ठहरने के लिए सुव्यवस्थित योजना बनाना आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि आज आम जनता भी हर प्रकार की सहायता के लिए तैयार है। इसलिए हौज़ा-ए-इल्मिया को आवश्यक संसाधन जुटाने के लिए पड़ोसियों, दानदाताओं, शिक्षकों, मुबल्लिग़ीन और आम लोगों की क्षमताओं का पूरा उपयोग करना चाहिए, ताकि प्रत्येक मदरसा एक सक्रिय मौकिब का रूप ले सके।

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