हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामी क्रांति के रहबर-ए-शहीद तथा उनके परिवार के अन्य शहीदों की जनाज़े की नमाज़ आज मंगलवार को मस्जिद-ए-मुक़द्दस जमकरान में आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली की इमामत में अदा की गई, जिसमें विलायत से प्रेम रखने वाले लाखों लोगों ने भाग लिया।
नमाज़ ए जनाज़ा के दौरान आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली अपने आँसुओं पर काबू नहीं रख सके और शहीद नेता के ग़म में रो पड़े। उन्होंने नमाज़ के अंतिम भाग में शहीद नेता के गुणों और सेवाओं का उल्लेख करते हुए एक विशेष "शहादतनामा" पढ़ा, जिसके प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:
اللَّهُمَّ إِنَّهُ نَزَلَ مُجاهِداً، مُبالِغاً، وَرِعاً، مُوَحِّداً، مُتَأَلِّهاً अल्लाहुम्मा इन्नहू नजला मुजाहेदन, मुबालेग़न, वरेअन, मुवाहेदन, मुत्अल्लेहन
हे पालनहार! वह तेरे समक्ष इस अवस्था में उपस्थित हुआ है कि वह महान मुजाहिद था, अपने कर्तव्यों के पालन में अत्यंत परिश्रमी था, अत्यंत धर्मपरायण, एकेश्वरवादी और ईश्वर-भक्त था।
इसके बाद उन्होंने शहीद नेता की शहादत की गवाही देते हुए कहा:
اللَّهُمَّ، اللَّهُمَّ، اللَّهُمَّ، إِنَّهُ نَزَلَ عِنْدَکَ شَهِيدًا لِلْإِسْلَامِ وَالْقُرْآنِ وَالْعِتْرَةِ؛ هَذَا أَوَّلًا अल्लाहुम्मा, अल्लाहुम्मा, अल्लाहुम्मा, इन्नहू नजला इंदका शहीदन लिल इस्लामे वल क़ुरआने वल इत्रते, हाज़ा अव्वलन
हे पालनहार! हे पालनहार! हे पालनहार! वह तेरे समक्ष इस्लाम, क़ुरआन और अहल-ए-बैत (इत्रत) की राह में शहीद होकर उपस्थित हुआ है, और यह हमारी पहली गवाही है।
इसके बाद उन्होंने शहीद नेता के बलिदान के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा:
اللَّهُمَّ، اللَّهُمَّ، اللَّهُمَّ، إِنَّهُ نَزَلَ عِنْدَكَ قَتِيلًا لِلْإِسْلَامِ؛ قَتِيلًا لِلْأُمَّةِ الْمُسْلِمَةِ؛ قَتِيلًا لِسِيَاسَتِهَا؛ قَتِيلًا لِصِيَانَتِهَا؛ قَتِيلًا لِكِيَانِهَا؛ قَتِيلًا لِعَظَمَتِهَا وَسِيَادَتِهَا وَمَوْلَوِيَّتِهَا وَوَحْدَتِهَا अल्लाहुम्मा अल्लाहुम्मा, अल्लाहुम्मा, इन्नहू नजला इंदका क़तीलन लिल इस्लामे, क़तीलन लिल उम्मतिल मुस्लेमते, क़तीलन लेसियासतेहा, क़तीलन लेसेयानतेहा, क़तीलन लेकियानेहा, क़तीलन लेअजमतेहा व सेयादतेहा व मौलवीयतेहा व वहदतेहा
हे पालनहार! वह इस्लाम की खातिर मारा गया, मुस्लिम उम्मत की खातिर मारा गया, उसके इस्लामी शासन और व्यवस्था की खातिर, उसकी रक्षा की खातिर, उसके अस्तित्व और पहचान की खातिर, तथा उसकी महानता, नेतृत्व, विलायत और एकता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर तेरे समक्ष उपस्थित हुआ है।
दुआ के अंत में आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने दुआ की:
اللَّهُمَّ احْشُرْهُ مَعَ الْأَئِمَّةِ الْهُدَاةِ الْمَهْدِيِّينَ अल्लाहुम्मा एहशुरहो मअल आइम्मतिल हुदातिल महदीय्यीना
हे पालनहार! उन्हें मार्गदर्शक और सत्यपथ प्रदर्शक इमामों के साथ पुनर्जीवित कर।
وَاخْلُفْ عَلَى أَهْلِهِ فِي الْغَابِرِينَ، وَصَلِّ عَلَيْهِ وَعَلَيْهِمْ أَجْمَعِينَ، وَاحْشُرْنَا مَعَهُ مَعَ عِنَايَتِكَ وَعِنَايَةِ مُحَمَّدٍ وَعِتْرَتِهِ الطَّاهِرِينَ वख़लुफ़ अला अहलेहि फ़ील ग़ाबेरीना, व सल्ले अलैहे व अलैहिम अजमईना, वहशुरना मअहू मअ इनायतेका व इनायते मुहम्मदिन व इतरतेहित ताहेरीना
हे पालनहार! उनके परिवार के लिए तू सर्वोत्तम संरक्षक और सहायक बन, उन पर तथा उनके समस्त परिवार पर अपनी कृपा और दया बरसा, और अपनी विशेष कृपा तथा हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) और उनकी पवित्र अहल-ए-बैत (अ) की कृपा के सदके हमें भी उनके साथ पुनर्जीवित कर।
उल्लेखनीय है कि नमाज़ ए जनाज़ा से पहले आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने शहीद नेता के अम्मामे को अत्यंत श्रद्धा और प्रेम के साथ चूमा। यह दृश्य उपस्थित लोगों के लिए अत्यंत भावुक और आस्था को प्रेरित करने वाला था तथा इसे मरजइयत और विलायत के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक माना गया।
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