हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का पवित्र शहर मशहद आज तेहरान, क़ुम, नजफ़ और करबला की ऐतिहासिक और अभूतपूर्व विदाई परंपराओं की निरंतरता में "रहबर शहीद" को अंतिम विदाई देने का केंद्र बना। यहाँ उनके पार्थिव शरीर पर जनाज़े की नमाज़ उनके बड़े पुत्र आयतुल्लाह सैयद मुस्तफ़ा हुसैनी ख़ामनेई की इमामत में अदा की गई।
आठवें इमाम हज़रत इमाम रज़ा (अ) का पवित्र हरम आज अपने समर्पित सेवक को अपनी गोद में समेट रहा है। ख़ुरासान की धरती और आकाश भी इन क्षणों में गहरे शोक में डूबे हुए हैं। यह वही शोक है जिसकी शुरुआत तेहरान, क़ुम और नजफ़ से हुई, जो करबला के बैनुल हरमैन में अपने चरम पर पहुँचा और अब हरम-ए-इमाम रज़ा (अ.) में अपनी अंतिम मंज़िल तक पहुँच गया है।

रहबर शहीद (रह.) और उनके परिवार के सदस्यों के पार्थिव शरीर को लेकर आने वाला विमान इराक़ में भावपूर्ण विदाई तथा नजफ़ और करबला के लोगों की भारी उपस्थिति और स्वागत के कारण हुई देरी के बाद मशहद के शहीद हाशमीनेज़ाद हवाई अड्डे पर उतरा।
तशीयी (अंतिम यात्रा) समिति की घोषणा के अनुसार, इस अस्थायी समय परिवर्तन के बावजूद ईरान की आध्यात्मिक राजधानी मशहद में भव्य अंतिम विदाई और अंतिम यात्रा आज दोपहर 2 बजे से शुरू हुई, ताकि मशहद-ए-रज़ा अपने समर्पित सेवक का सदा के लिए मेज़बान बन सके। अब से कुछ ही देर बाद रहबर शहीद (रह.) तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों के पार्थिव शरीरों को इमाम रज़ा (अ.) के पवित्र हरम के रिवाक़ दारुलज़िक्र में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
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