शुक्रवार 17 जुलाई 2026 - 18:42
अल्लामा तबातबाई की नज़र में मारिफ़त-ए-इलाही के हुसूल के दो बुनियादी रास्ते

अल्लामा सैयद मुहम्मद हुसैन तबातबाई ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "लुब्बुल लुबाब" में ईश्वर-ज्ञान और आंतरिक बाधाओं को दूर करने के लिए दो प्रभावी रास्ते बताए हैं: ध्यानपूर्वक क़ुरआने करीम की तिलावत और हज़रत इमाम हुसैन (अ.) से मदद माँगना।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अल्लामा सैयद मुहम्मद हुसैन तबातबाई ने अपनी पुस्तक "लुब्बुल लुबाब दर सैर-ओ-सुलूक-ए-ऊलिल अलबाब" में ईश्वर-ज्ञान के इच्छुक लोगों के लिए दो ऐसे व्यावहारिक तरीके बताए हैं जिन्हें आध्यात्मिक उन्नति और हृदय की बाधाओं को दूर करने का प्रभावी साधन माना गया है।

अल्लामा तबातबाई के अनुसार जिन व्यक्तियों को मानसिक शंकाओं और नफ़सानी विचारों से मुक्ति मिली और जिनके लिए ईश्वर-ज्ञान के द्वार खुले, उनकी सफलता आम तौर पर इन दो रास्तों में से किसी एक के माध्यम से प्राप्त हुई।

पहला रास्ता क़ुरआने करीम की तिलावत के दौरान इस वास्तविकता पर गहराई से विचार करना है कि वास्तविक पाठक (यानी सुनने वाला और समझने वाला) कौन है। उनके अनुसार जब मनुष्य इस सत्य को हृदय से महसूस करता है तो उस पर ज्ञान के नए दरवाजे खुल जाते हैं।

दूसरा रास्ता हज़रत इमाम हुसैन (अ) से मदद माँगना है। अल्लामा तबातबाई फरमाते हैं कि ईश्वर के मार्ग पर चलने वालों के लिए इमाम हुसैन (अ) की विशेष कृपा है, और उनकी बारगाह से मदद माँगना आंतरिक आवरणों और आध्यात्मिक बाधाओं को दूर करने में अत्यंत प्रभावी साबित होता है।

सन्दर्भ: अल्लामा तबातबाई, पुस्तक: लुब्बुल लुबाब दर सैर-ओ-सुलूक-ए-ऊलिल अलबाब, पृष्ठ 150।

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