सोमवार 3 अगस्त 2026 - 17:00
ईरान युद्ध की जानकारी छिपाने पर ट्रंप प्रशासन से कांग्रेस नाराज़

हौज़ा / ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर ट्रंप प्रशासन एक बार फिर पारदर्शिता के सवालों से घिरता दिखाई दे रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के प्रमुख नेताओं में शामिल ओहायो से सांसद माइक टर्नर ने कहा है कि, सरकार अब भी कांग्रेस को इस युद्ध और उससे जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की पर्याप्त जानकारी नहीं दे रही है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर ट्रंप प्रशासन एक बार फिर पारदर्शिता के सवालों से घिरता दिखाई दे रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के प्रमुख नेताओं में शामिल ओहायो से सांसद माइक टर्नर ने कहा है कि, सरकार अब भी कांग्रेस को इस युद्ध और उससे जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की पर्याप्त जानकारी नहीं दे रही है।

उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कांग्रेस को सैन्य अभियानों से संबंधित आवश्यक जानकारी मिलना उसका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस मामले में प्रशासन अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहा।

प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्य और पूर्व खुफिया समिति के अध्यक्ष माइक टर्नर ने सीबीएस न्यूज़ से बातचीत में कहा कि सरकार कांग्रेस के साथ कहीं अधिक जानकारी साझा कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,मुझे नहीं लगता कि हमें जो जानकारी मिल रही है, उससे कोई भी संतुष्ट है।

टर्नर ने यह भी बताया कि, केवल प्रतिनिधि सभा ही नहीं, बल्कि सीनेट के सदस्यों ने भी इस बात पर चिंता जताई है कि पेंटागन को युद्ध की वास्तविक स्थिति, उसके उद्देश्यों, परिणामों और संभावित जोखिमों के बारे में सांसदों को अधिक विस्तृत जानकारी देनी चाहिए।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि माइक टर्नर सामान्यतः ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति के समर्थक रहे हैं और रिपब्लिकन पार्टी के सबसे सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे नेता द्वारा भी सरकार की सूचना नीति पर असंतोष व्यक्त किया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि, ट्रंप प्रशासन युद्ध से जुड़े तथ्यों को साझा करने में अपेक्षित पारदर्शिता नहीं बरत रहा।

विश्लेषकों का मानना है कि, यदि सरकार कांग्रेस को समय पर और पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराती, तो इससे न केवल प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठेंगे, बल्कि युद्ध जैसे संवेदनशील मामलों में लोकतांत्रिक निगरानी भी कमजोर होगी।

विपक्षी नेताओं का भी कहना है कि, राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर आवश्यक सूचनाओं को सीमित करना लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को कमजोर कर सकता है और इससे प्रशासन की कार्यशैली पर अविश्वास बढ़ सकता है।

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