बुधवार 16 सितंबर 2026 - 19:42
जंग के मैदान में नाकामी के बाद दुश्मन ने युवा पीढ़ी के विचारों और मान्यताओं को निशाना बना लिया है

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन असदुल्लाह रज़वानी ने कहा कि युद्ध के मैदान में दुश्मन की नाकामी के बाद अब युवा पीढ़ी के विचारों और धार्मिक मान्यताओं को प्रभावित करने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे हालात में प्रचारकों को चाहिए कि वे ईमान और उम्मीद को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं की जरूरतों के अनुरूप धार्मिक सामग्री पेश करें और उनके सवालों व शंकाओं का जवाब दें।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन असदुल्लाह रज़वानी ने इस शहर में आयोजित ‘मबल्लिग़ाते अमीन’ की बैठक में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि धार्मिक प्रचारकों का आम लोगों, विशेष रूप से छात्रों के साथ अधिक संपर्क रहता है। इसलिए आपको युवा पीढ़ी की धार्मिक शंकाओं को सामने लाने, उन्हें स्पष्ट करने और उनकी व्याख्या करने के लिए भरपूर प्रयास करना चाहिए।

उन्होने कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान की पवित्र इस्लामी व्यवस्था के दुश्मन धर्म और इस्लाम के संबंध में विभिन्न प्रकार की शंकाएं पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में आपकी जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील है।

उन्होंने कुरआन के विषय पर बात करते हुए कहा कि कुरआन के संबंध में आकर्षक और प्रभावी सामग्री प्रस्तुत की जानी चाहिए तथा शिक्षा और प्रशिक्षण में इसे विशेष महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि प्रशिक्षित होने वाली पीढ़ी समाज का मार्गदर्शन करने के साथ-साथ इस क्षेत्र में स्वयं भी दृढ़ और स्थिर रहे।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रज़वानी ने आगे कहा कि युवाओं के मन में शंका आसानी से पैदा हो जाती है, लेकिन उसे दूर होने में समय लगता है। इसलिए उनके सवालों और शंकाओं का इस तरह जवाब दिया जाना चाहिए कि उनके मन में मौजूद शंकाएं पूरी तरह दूर और हल हो जाएं।

बोइन ज़हरा के इमाम ए जुमा ने कहा कि युवाओं के धार्मिक सवालों और शंकाओं का सटीक, विशेषज्ञतापूर्ण तथा उनकी बौद्धिक क्षमता और आवश्यकताओं के अनुरूप जवाब देना उन्हें धार्मिक विषयों, नमाज़ की अदायगी और मस्जिद में उपस्थिति की ओर अधिक आकर्षित करने का माध्यम बन सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि हमारा श्रोता ज्ञान और विचार के स्तर पर किस स्थिति में है और उसकी जरूरतें क्या हैं। इसके बाद श्रोता की जरूरत और समझ के स्तर के अनुसार सामग्री तैयार करके प्रस्तुत की जानी चाहिए।

उन्होने कहा कि युवाओं की शंकाओं का जवाब देने के लिए मदरसों में धार्मिक प्रचारकों और प्रचारिकाओं की मौजूदगी आवश्यक है। अनुभव से साबित हुआ है कि युवा पीढ़ी धार्मिक विषयों को स्वीकार करती है और इन गतिविधियों का स्वागत भी करती है।

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