मंगलवार 18 अगस्त 2026 - 19:44
शहीद इमाम ख़ामेनेई के चालीसवें के अवसर पर ईरान की क्रांतिकारी जनता के शहीद के साथ 5 संकल्प

शहीद रहबर के चालीसवें के अवसर पर ईरान की क्रांतिकारी जनता का कहना है कि हम इस दूरदर्शी रहबर के साथ यह मजबूत संकल्प करते हैं कि अपनी ईरानी और क्रांतिकारी पहचान को सुरक्षित रखते हुए और उसे और मजबूत बनाते हुए, अपने सिद्धांतों और मूल्यों से जुड़े रहकर, इस्लामी गणराज्य ईरान की पवित्र व्यवस्था की हर क्षेत्र में प्रगति और विकास तथा इस्लामी क्रांति की प्रतिष्ठा और सफलता के लिए पूरी लगन से प्रयास करते रहेंगे।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार से गुरुवार तक क्रमशः तेहरान, क़ुम और मशहद शहीद रहबर के पार्थिव शरीर की अंत्येष्टि के चालीसवें दिन के अवसर पर विशेष कार्यक्रमों की मेज़बानी करेंगे। निस्संदेह, इन कार्यक्रमों का आयोजन उस महान विरासत को फिर से याद करने और उसका जायज़ा लेने का एक बेहतरीन अवसर है, जो पिछले कई दशकों के दौरान इस प्रिय शहीद के मार्गदर्शन और नेतृत्व के कारण इस्लामी गणराज्य ईरान की पवित्र व्यवस्था के लिए सैन्य, राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और अन्य क्षेत्रों में बाकी रह गई है।

इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि क्रांति और व्यवस्था के जीवन के इस नए दौर में, सर्वोच्च रहबर की पैरवी करते हुए, हम ईरानी अपने शहीद इमाम के साथ किए गए उन संकल्पों और वादों पर पहले से अधिक मजबूती के साथ कायम रहेंगे और अपने क्रांतिकारी तथा ईमानी मूल्यों की शालीनता के साथ रक्षा करेंगे।

ईरानी जनता का कहना है कि दुश्मनों का विचार था कि क्रांति के दूरदर्शी रहबर को कायरतापूर्ण ढंग से शहीद करने के बाद मार्गदर्शन और प्रकाश का रास्ता अंधकारमय हो जाएगा, लेकिन वे यह नहीं समझ सके कि उनका नेतृत्व, उनका जीवन-चरित्र और उनका मार्गदर्शन कोई नश्वर चीज़ नहीं, बल्कि लोगों का हमेशा मार्गदर्शन करने वाला एक शाश्वत घोषणापत्र है।

इसलिए आज उनके निर्देश और उनके शब्द पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली होकर इतिहास के हर दौर में एक प्रतिध्वनि की तरह पूरी शक्ति के साथ सुनाई देते रहेंगे।

1- एकता और एकजुटता पर हमेशा ज़ोर

शहीद इमाम की हमेशा से यह हिदायत रही, जिसकी जड़ें महान इमाम ख़ुमैनी के प्रकाशमय विचार और सिद्धांत में भी मौजूद हैं, कि धार्मिक और क्रांतिकारी आदर्शों के साए में राष्ट्रीय एकता और एकजुटता को बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक है।

शहीद रहबर ने 10 मार्च 2022 को एक बैठक में कहा: जब हम राष्ट्रीय शक्ति की बात करते हैं तो यह एक संयुक्त विषय है, एक संपूर्ण व्यवस्था है; एक-दूसरे से जुड़ा हुआ समूह है। राष्ट्रीय शक्ति को किसी एक विशेष स्थान, किसी एक विशेष धारा या गतिविधि तक सीमित नहीं समझना चाहिए।

अब हम अपने शहीद रहबर के पवित्र पार्थिव शरीर के दफ़्न के चालीसवें के अवसर पर संकल्प करते हैं कि इस आपस में जुड़े हुए समूह के हिस्सों के रूप में, आपसी सहयोग, समन्वय और एकजुटता के साथ, एकजुट शरीर की तरह ईरान की शक्ति और राष्ट्र के सम्मान एवं प्रतिष्ठा के लिए प्रयास करेंगे।

निश्चित रूप से इसके साथ हम यह भी संकल्प करते हैं कि यदि हमें कोई आलोचना या मांग प्रस्तुत करनी हो तो उसे इस तरह व्यक्त करेंगे कि राष्ट्रीय एकता और एकजुटता को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।

2- इरादों की लड़ाई में आत्मनिर्माण

इस्लामी क्रांति के जोश और उतार-चढ़ाव से भरे इतिहास के अनुभव ने हमें यह साबित कर दिया है कि दुश्मन हमेशा हमारी इच्छाशक्ति को कमजोर करने की कोशिश करता है। विशेष रूप से पिछले वर्षों में उसने पहचान और सोच की लड़ाई पर ध्यान केंद्रित करते हुए विभिन्न संचार माध्यमों के द्वारा इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाया है।

शहीद रहबर ने 8 जनवरी 2011 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात की ओर संकेत करते हुए कहा: हम सभी को यह भी जान लेना चाहिए कि दुश्मनी... मौसमी और अस्थायी नहीं है; यह दुश्मनी व्यक्तिगत और मूलभूत दुश्मनी है... जब भी उन्हें हमें नुकसान पहुंचाने का अवसर मिलेगा, वे नुकसान पहुंचाएंगे। इसका इलाज यह है कि हम स्वयं को मजबूत बनाएं।

आत्मनिर्माण और आंतरिक शक्ति को मजबूत बनाना निस्संदेह ऐसे दुष्ट दुश्मन का मुकाबला करने का सबसे प्रभावी साधन है, जिसने हमें किसी भी तरह नुकसान पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। जैसा कि हाल ही में थोपी गई जंग में हमने उसकी दुश्मनी की चरम सीमा उस समय देखी, जब हमारे प्रिय रहबर और ईरान के अनेक नागरिक, जिनमें सैनिक और आम लोग भी शामिल थे, शहादत को प्राप्त हुए।

ऐसे संवेदनशील दौर में हम ईरानी अपने शहीद इमाम और शहीद रहबर के साथ यह संकल्प करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बदलाव की उम्मीद लगाकर बाहर की ओर देखने के बजाय अपने अंदर झांकेंगे, अपना सुधार करेंगे और अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत बनाएंगे, ताकि देश के सामने मौजूद चुनौतियों और कठिनाइयों, विशेष रूप से आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों से निकलने के लिए आवश्यक आधार तैयार किया जा सके।

3- देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए निरंतर संघर्ष

शहीद रहबर के विचारों में साम्राज्यवादियों के अपमान और प्रभुत्व के शिकंजे से बाहर निकलने की मूल शर्त ज्ञान पर अधिकार प्राप्त करना है। इसलिए उन्होंने 10 मार्च 2016 को प्रसिद्ध हदीस "अल-इल्मु सुल्तान" अर्थात "ज्ञान शक्ति है" की ओर संकेत करते हुए कहा: अगर हमें शक्ति चाहिए, अगर हमें सम्मान चाहिए तो हमें ज्ञान को मजबूत करना होगा।

इसी तरह उन्होंने 8 जनवरी 2017 को क़ुम की क्रांतिकारी जनता से मुलाकात में कहा: शक्ति के कारकों में से एक वैज्ञानिक क्षेत्र में तेज़ गति से प्रगति करना और वैज्ञानिक शक्ति प्राप्त करने के रास्ते में प्रयास करना है।

इस महान सत्यवादी व्यक्ति के पवित्र पार्थिव शरीर के दफ़्न के चालीसवें के अवसर पर हम संकल्प करते हैं कि ज्ञान का इस्तेमाल केवल डिग्री प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि अपने प्रिय और गौरवशाली ईरान की शक्ति और सामर्थ्य के लिए करेंगे।

हम वैज्ञानिक प्रगति और वैज्ञानिक शक्ति प्राप्त करने के रास्ते में लगातार प्रयास करते हुए ज्ञान की शक्ति को अपने राष्ट्र के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनाएंगे।

4- प्रतिरोधी अर्थव्यवस्था की मांग को व्यवहार में लागू करना

कई वर्षों से शहीद रहबर ने प्रतिरोधी अर्थव्यवस्था को हर क्षेत्र में व्यवहार में पूरी तरह लागू करने के महत्व पर जोर दिया और विभिन्न भाषणों में जनता, अधिकारियों, विद्वानों और संचार माध्यमों की जिम्मेदारियों की याद दिलाई।

उनके विचार में प्रतिरोधी अर्थव्यवस्था को व्यवहार में लागू करना देश की शक्ति और सामर्थ्य के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। इसलिए इस उद्देश्य के लिए लगातार प्रयास करना, विशेष रूप से वर्तमान संवेदनशील दौर में, बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, क्योंकि दुश्मन ने हमारे देश के खिलाफ सैन्य युद्ध के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ा दिया है।

ईरान की क्रांतिकारी जनता का कहना है कि इस अवसर पर हम अपने शहीद रहबर के साथ संकल्प करते हैं कि देश में होने वाले उत्पादन का गंभीरता से और केवल नारों से आगे बढ़कर समर्थन करेंगे, पश्चिमी और विदेशी उत्पादन पर निर्भरता की प्रवृत्ति का मुकाबला करेंगे और देश की अर्थव्यवस्था को ऐसा अभेद्य किला बनाएंगे कि कोई भी बाहरी दबाव जनता की रोज़मर्रा की जरूरतों और उनके आर्थिक सुरक्षा को खतरे में न डाल सके।

5- ईरानी और इस्लामी पहचान के आधार पर क्षमताओं को निखारना

ईरानी जनता का कहना है कि हमने शहीद इमाम ख़ामेनेई के प्रकाशमय विचारों से यह सीखा है कि पहचान और आत्मबोध, रचनात्मक क्षमताओं के विकास की मूल भूमि है। इसलिए उन्होंने 3 जून 2016 को कहा: जब कोई राष्ट्र अपनी पहचान और आत्मबोध को समझ लेता है तो उसकी क्षमताएं फलने-फूलने लगती हैं।

इस संवेदनशील दौर में सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक बात यह है कि अपनी क्षमताओं और योग्यताओं के विकास के लिए अपनी ईरानी और इस्लामी पहचान पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक है।

इसलिए हम अपने शहीद इमाम और शहीद रहबर के साथ संकल्प करते हैं कि राष्ट्रीय चेतना को मजबूत बनाते हुए और अपनी सांस्कृतिक तथा ईमानी जड़ों से अपने संबंध को मजबूत करते हुए, विशेष रूप से युवाओं की क्षमताओं को निखारने के लिए आवश्यक वातावरण उपलब्ध कराएंगे और इस तरह देश की हर क्षेत्र में प्रगति और विकास के रास्ते में और अधिक मजबूती से कदम बढ़ाएंगे।

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