शनिवार 5 सितंबर 2026 - 07:52
तक़्वा-ए-इलाही अपनाना ही कामयाबी और निजात का रास्ता है

हौज़ा / इमाम ए जुमआ भादी शाहगंज मौलाना मासूम रज़ा कैफ़ी ने जुमआ के ख़ुत्बे में तक़्वा को इंसान की पहली ज़िम्मेदारी बताते हुए कहा कि अल्लाह पर भरोसा रखने वाला कभी मायूसी को अपनी ज़िंदगी पर हावी न होने दे। उन्होंने अहल-ए-बैत अ.स. की सीरत पर अमल, सोशल मीडिया पर ग़लत सामग्री फैलाने से परहेज़ और दुनिया भर के मज़लूमों के समर्थन में आवाज़ उठाने की अपील की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मौलाना सय्यद  मासूम रज़ा कैफी ने जुमआ के ख़ुत्बे में नमाज़ियों को तक़्वा की नसीहत करते हुए कहा कि तक़्वा-ए-इलाही हमारी सबसे पहली ज़िम्मेदारी है। निस्संदेह हर वह इंसान जो तक़्वे के साथ ज़िंदगी गुज़ारता है दुनिया में कभी भी ऐसी मुश्किलात और परेशानियों में नहीं फंसता जिनसे निकलना मुश्किल हो क्योंकि ख़ुदावंद-ए-आलम ने क़ुरान मजीद में ऐलान किया है कि जो तक़्वा इख़्तियार करेगा अल्लाह उसके लिए रास्ते आसान कर देगा। 

मौलाना सय्यद मासूम रज़ा कैफी ने नाउम्मीदी और निराशा के नुक़सान बयान करते हुए कहा कि क़ुरान करीम और अहादीस-ए-मासूमीन (अ.स.) की रौशनी में नाउम्मीदी और निराशा कुफ़्र है। निराशा सबसे बड़ा गुनाह है विनाश का पेश ख़िम्मा है निराशा आग है जो जला देती है। 

मौलाना सय्यद मासूम रज़ा कैफी ने दुआ-ए-कुमैल के फ़क्रा इरहम मन रअसु मालिहिर्रजा यानी ऐ ख़ुदा! तू उस पर रहम कर जिसका सारा माल (पूंजी) तुझसे उम्मीद हो को बयान करते हुए कहा कि हम मौला अली (अ.स.) पर ईमान रखते हैं, इसलिए उनके फ़रमान पर अमल करें और यक़ीन कर लें कि हमारी पूरी पूंजी उम्मीद है नाउम्मीदी नहीं है। 

मौलाना सय्यद मासूम रज़ा कैफी ने कहा कि कोशिश करें कि वह काम करें जिससे हम अहल-ए-बैत (अ.स.) के क़रीब हों, ऐसे काम न करें जिससे हम अहल-ए-बैत (अ.स.) से दूर हो जाएं। 

मौलाना सय्यद मासूम रज़ा कैफी ने मोमिनीन से अपील करते हुए कहा कि ऐसी वीडियोज़ को सोशल मीडिया पर शेयर करने और दूसरों को फॉरवर्ड करने से परहेज़ करें जिससे क़ौम की बदनामी होती है। बल्कि जो भी ऐसी चीज़ें भेज रहे हैं, उन्हें भी मना करें और जिनकी वीडियो हो, उनसे बात करके समझाएं कि आगे ऐसा न करें। हम ख़ुद किसी बुरी बात या बुरे काम को फैलाने का सबब न बनें। 

मौलाना सय्यद मासूम रज़ा कैफी ने इमाम हुसैन (अ.स.) की हदीस मेरे जैसा, उस (यज़ीद) जैसे की बैअत नहीं कर सकता को बयान करते हुए कहा कि यानी क़यामत तक हुसैन अ.स. यज़ीद की बैअत नहीं कर सकते। कोई भी हुसैनी किसी यज़ीद की बैअत नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि आज अमेरिका इसराइल दुनिया भर में जुल्म कर रहे हैं मानवाधिकार का नारा लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं? आख़िर क्यों ख़ामोश हैं? 

मौलाना सय्यद मासूम रज़ा कैफी ने नेक अमल के सिलसिले में कहा कि हम लोगों को दिखाने के लिए काम न करें, बल्कि सिर्फ़ मौला को दिखाने के लिए काम करें

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