शनिवार 5 सितंबर 2026 - 11:06
मदरसा ए इल्मिया शोधात्मक बदलाव का प्रारंभिक बिंदु और मुख्य केंद्र है

हौज़ा / हौज़ा ए इल्मिया के प्रांतीय शोध मामलों के प्रभारियों की 14वीं बैठक वेबिनार के माध्यम से आयोजित की गई।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रांतीय प्रशासनिक केंद्रों के शोध मामलों के प्रभारी एवं संबंधित अधिकारियों की भागीदारी में शोध मामलों के प्रांतीय प्रभारियों की 14वीं बैठक वेबिनार के माध्यम से आयोजित हुई।

बैठक में मदरसों और हौज़वी केंद्रों में शोध गतिविधियों को मज़बूत बनाने के लिए विभिन्न विषयों और कार्यप्रणालियों पर चर्चा की गई। प्रमुख विषयों में प्रस्तावों पर अमल की निगरानी, मदरसा-ए-इल्मिया में शोध के स्थान को मजबूत करना तथा शैक्षिक एवं प्रशिक्षण समूहों की शोध गतिविधियों को व्यवस्थित करना शामिल था।

रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में तय किया गया कि बैठकों में सामने आने वाली चुनौतियों और सुझावों को हौज़ा-ए-इल्मिया की उच्च परिषद के सचिवालय को भेजा जाएगा, ताकि उन्हें व्यापक स्तर पर नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सके।

इसी प्रकार प्रस्तावों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए शोध के विकास विभाग के अंतर्गत चार निगरानी परिषदों के गठन का निर्णय भी लिया गया। इसका उद्देश्य प्रस्तावों को गंभीरता से लागू कराना और निर्णयों को केवल सुझाव या प्रस्ताव तक सीमित रहने से रोकना है।

बैठक के निर्णय के अनुसार, हौज़ा-ए-इल्मिया के शिक्षा विभाग की ओर से शैक्षिक इकाइयों के शिक्षा सहायकों को शोध कार्यक्रमों के नियमों और दिशा-निर्देशों से अवगत कराने में सहयोग किया जाएगा, ताकि मदरसों और हौज़वी केंद्रों में शिक्षा और शोध के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण समूहों की शोध संबंधी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को आगामी नियमों में शामिल करने का विषय भी बैठक में चर्चा के लिए रखा गया। तय किया गया कि शिक्षा विभाग के सहयोग से इस मामले की समीक्षा कर इसे व्यवस्थित किया जाएगा।

हौज़ा-ए-इल्मिया में शोध मामलों के प्रभारी हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन फरहाद अब्बासी ने अपने संबोधन में मदरसा-ए-इल्मिया की शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही बड़े कदम नहीं उठाए जा सकते, बल्कि इस मार्ग पर धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा,मदरसा-ए-इल्मिया शोधात्मक बदलाव का प्रारंभिक बिंदु और मुख्य केंद्र है। सबसे पहले मदरसों की शोध स्थिति को स्वीकार्य और वांछित स्तर तक पहुंचाना चाहिए और इस चरण के मजबूत होने का विश्वास होने के बाद ही अगले चरणों की ओर बढ़ना चाहिए।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन फरहाद अब्बासी ने आगे कहा कि मदरसों के कुछ मामलों की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं को सौंपी जानी चाहिए, जो शोध मामलों के प्रांतीय प्रभारियों के साथ लगातार संपर्क में रहें और मदरसों से जुड़े शोध संबंधी समस्याओं एवं मामलों की निगरानी तथा उन्हें व्यवस्थित करने की क्षमता रखते हों।

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