शनिवार 5 सितंबर 2026 - 13:42
खानदान-ए-नबूवत, इलाही करामत की बुलंदी है।आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी

हौज़ा / आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अ.स.के रिवायत की व्याख्या करते हुए पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) के परिवार को “पाकीज़ा वृक्ष” बताया, जिसकी जड़ें हज़रत इब्राहीम (अ.स.) से लेकर ख़ातमुल-अंबिया हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.ल.) तक फैली हुई हैं। उन्होंने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) का पवित्र अस्तित्व एक अनमोल रत्न की तरह है, जिसमें तमाम फ़ज़ीलतें और पाकीज़गी एकत्र हैं और मुस्लिम उम्मत इस नूरानी सिलसिले की पैरवी पर गर्व करती है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मरकज़ी प्रांत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने आज सुबह अपने दरस ए ख़ारिज में नहजुल बलाग़ा में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ.स.) के कथनों का उल्लेख करते हुए पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) के परिवार की महान विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने हज़रत मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह (स.ल.) को सबसे बेहतरीन और पाकीज़ा मूल एवं उद्गम से चुना।

उन्होंने कहा कि इंसानों और परिवारों की दुनिया में विभिन्न स्तर और दर्जे होते हैं। पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) को सबसे श्रेष्ठ परिवार और सबसे पाकीज़ा मूल से चुना गया। यह परिवार एक शजर-ए-तय्यैबा (पाकीज़ा वृक्ष) की तरह है, जिसकी जड़ें तौहीद, ईमान, मारिफ़त, विलायत और नबूवत में हैं।

इमाम ए जुमआ अराक ने कहा,यह इब्राहीमी शजर-ए-तय्यैबा सदियों तक जारी रहा और इसी नस्ल से अल्लाह के पैग़म्बर प्रकट होते रहे, यहां तक कि यह सिलसिला ख़ातमुल-अंबिया हज़रत मुहम्मद (स.ल.) के मुबारक वजूद तक पहुंचा।

आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने हज़रत इब्राहीम (अ.स.) द्वारा अपनी औलाद के लिए की गई दुआ का उल्लेख करते हुए इस परिवार में तौहीद और नबूवत के निरंतर जारी रहने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम उम्मत को इस बात पर गर्व है कि वह हज़रत इब्राहीम (अ.स.) के रास्ते पर है और क़ुरआन मजीद भी इस संबंध की पुष्टि करता है।

मरकज़ी प्रांत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) के हरम-ए-अमन यानी मक्का मुकर्रमा में प्रकट होने की ओर भी संकेत किया, जिस धरती की सुरक्षा और बरकत के लिए हज़रत इब्राहीम (अ.स.) ने दुआ की थी। उन्होंने इसे तौहीद, नबूवत और विलायत के शजर की उपजाऊ भूमि बताया।

उन्होंने आगे अब्दुल मुत्तलिब, अबू तालिब, अब्दुल्लाह, हज़रत आमिना (स.ल.) और हज़रत ख़दीजा (स.ल.) जैसी महान हस्तियों के स्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) के उत्तराधिकारी भी सबसे श्रेष्ठ उत्तराधिकारियों में से हैं। उनका पवित्र अस्तित्व एक शुद्ध और अनमोल रत्न की तरह है, जो हर प्रकार की मिलावट से पाक तथा करामत, पाकीज़गी और बुज़ुर्गी की तमाम विशेषताओं का वाहक है।

आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने अंत में कहा कि नबूवत और विलायत का पाकीज़ा वृक्ष तौहीद और बंदगी में जड़ें रखता है तथा पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) और अहले-बैत (अ.ल.) इस नूरानी वृक्ष की बुलंदी पर विराजमान हैं।

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