मंगलवार 15 सितंबर 2026 - 13:31
इटली में कुरआन जलाने की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया, धार्मिक नफरत फैलाने का विरोध

इटली के रेज्जो एमिलिया शहर में एक व्यक्ति द्वारा कुरआन का अपमान कर उसे जलाने की घटना पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। विभिन्न वर्गों ने धार्मिक पवित्र स्थलों और धार्मिक मान्यताओं के अपमान की निंदा करते हुए नफरत फैलाने के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इटली के रेज्जो एमिलिया शहर में एक व्यक्ति द्वारा कुरआन का अपमान कर उसे जलाने की घटना पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। विभिन्न वर्गों ने धार्मिक मान्यताओं के अपमान की निंदा करते हुए नफरत फैलाने के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

फिरेंत्स वेंतूर्ली, जो सोशल मीडिया पर ‘इतेर्नो’ नाम से सक्रिय है, ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें वह कुरआन की एक प्रति को फाड़ने के बाद उसमें आग लगाता दिखाई दे रहा है। उसने अपने इस अपमानजनक कृत्य को ‘इस्लामी कट्टरपंथ’ के खिलाफ विरोध बताया।

वेंतूर्ली हाल ही में यूरोपीय संसद के सदस्य रोबर्तो वान्नाची के नेतृत्व में सक्रिय राजनीतिक आंदोलन ‘फुतूरो नात्सियोनाले’ में शामिल हुआ है। वीडियो में उसने ‘इटली को इस्लामी कट्टरपंथ से बचाने’ की मांग भी की।

रोबर्तो वान्नाची ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह वेंतूर्ली को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते और वह केवल इस आंदोलन का एक सदस्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन दूसरे धर्मों और संस्कृतियों का मजाक उड़ाने का समर्थन नहीं करता। इस आंदोलन के प्रांतीय प्रभारी मार्को लुत्सी ने भी कहा कि यह एक व्यक्ति का निजी कदम था और वेंतूर्ली के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

मेयर ने की निंदा

रेज्जो एमिलिया के मेयर मार्को मासारी ने कुरआन के अपमान की निंदा करते हुए इसे ‘अपमानजनक और भेदभाव पर आधारित’ बताया। उन्होंने शहर के मुस्लिम समुदायों के नाम एक पत्र में एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि कुरआन करोड़ों मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ और आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। इसलिए इसका सम्मान और एक-दूसरे के धर्मों का सम्मान नागरिक जीवन और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए जरूरी है।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आईं और इस्लाम, ईसाई धर्म, प्रवासन और इटली की राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू हो गई।

धार्मिक पवित्र ग्रंथों के अपमान के खिलाफ खुला पत्र

इस बीच, इटली में सामाजिक कार्यकर्ताओं और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों की ओर से एक खुला पत्र भी जारी किया गया, जिसमें कुरआन के अपमान की निंदा की गई।

पत्र में कहा गया कि धार्मिक पवित्र ग्रंथों और मान्यताओं का जानबूझकर अपमान समाज में नफरत और मतभेद बढ़ाने का माध्यम नहीं बनना चाहिए। पत्र के लेखकों ने ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ और ‘नफरत फैलाने’ के बीच अंतर स्पष्ट करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के बीच संवाद, आपसी सम्मान और सामाजिक शांति बनाए रखने पर भी जोर दिया। साथ ही सभी पक्षों से अपील की कि वे भड़काऊ और हिंसक प्रतिक्रिया से बचें तथा अपने विरोध को कानून के दायरे में शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करें।

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