सोमवार 14 सितंबर 2026 - 18:31
विद्यार्थियों के साथ सहानुभूतिपूर्ण सहयोग प्राथमिकता होनी चाहिए।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सलसाली

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन सलसाली ने गिलान प्रांत के प्रचारकों के साथ एक बैठक में देश के मौजूदा शैक्षिक एवं तरबीयती माहौल की नई संवेदनशीलताओं को स्पष्ट करते हुए प्रचारकों के दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रचारकों को सतही गतिविधियों से आगे बढ़कर विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ समझदारी, संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ जुड़ना चाहिए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन सलसाली ने गिलान प्रांत के प्रचारकों के साथ एक बैठक में देश के मौजूदा शैक्षिक एवं तरबीयती माहौल की नई संवेदनशीलताओं को स्पष्ट करते हुए प्रचारकों के दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रचारकों को सतही गतिविधियों से आगे बढ़कर विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ समझदारी, संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ जुड़ना चाहिए।

आज सुबह तरह अमीन के प्रचारकों की विचार-विमर्श बैठक हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन सलसाली, देश के तरह अमीन के निदेशक की उपस्थिति में आयोजित हुई। बैठक में स्कूलों में प्रचार के नए तरीकों तथा नई पीढ़ी के सामने मौजूद सांस्कृतिक चुनौतियों से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।

तरह अमीन के निदेशक ने मौजूदा प्रचारात्मक वातावरण की विशेष संवेदनशीलताओं का उल्लेख करते हुए दुश्मनों के मीडिया दबावों को स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा कि आज विरोधी मीडिया नेटवर्क पहलवी शासन का महिमामंडन करने और इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने के माध्यम से किशोर पीढ़ी की सोच को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में सतही और पारंपरिक प्रचार प्रभावी नहीं है। प्रचारकों को विद्यार्थियों के बीच शक-संदेहों और मीडिया धाराओं की पूरी समझ रखते हुए जिहाद-ए-तबयीन यानी सही तथ्यों और सच्चाई को स्पष्ट करने के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन सलसाली ने अपने भाषण के एक अन्य हिस्से में विद्यार्थियों के साथ संवाद की भाषा में बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि स्कूलों में प्रचार के क्षेत्र की गंभीर कमियों में से एक नारे और व्यवहार के बीच अंतर है। हमें विद्यार्थियों से केवल नारों की भाषा में बात नहीं करनी चाहिए, बल्कि इन नारों को स्कूल के वास्तविक वातावरण में गहरी और व्यावहारिक शिक्षा में बदलना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे मुखातब यानी विद्यार्थी टकराव नहीं, बल्कि सहयोग और साथ चाहते हैं। प्रचारकों को शब्दों के चयन में संवेदनशीलता और तरबीयती आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए विद्यार्थियों के साथ खड़ा होना चाहिए, ताकि विद्यार्थी प्रचारक को कोई दूर बैठा हुआ वक्ता नहीं, बल्कि स्कूल में एक सहायक और सच्चे शुभचिंतक के रूप में देखें।

तरह अमीन के निदेशक ने अंत में शिक्षकों के साथ दोतरफा संवाद को भी आवश्यक प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कहा कि स्कूलों में तरह अमीन की सफलता केवल चिंतित और जिम्मेदार शिक्षकों के सहयोग से ही संभव है। प्रचारकों को विद्यार्थियों और शैक्षिक कर्मचारियों के साथ भावनात्मक एवं पेशेवर संबंध स्थापित करना चाहिए, ताकि स्कूल का वातावरण धार्मिक तरबीयत और सकारात्मक उत्साह का केंद्र बन सके।

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