हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मरजा-ए-आली-क़द्र आयतुल्लाहिल उज़्मा सैय्यद मूसा शुबैरी ज़ंजानी रिज़वानुल्लाह अलैह की रेहलत पर मरजा-ए-आला दीनी आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्दयद अली हुसैनी सीस्तानी द०ज़ि० के लखनऊ मे स्थित कार्यालय ने दुख व्यक्त करते हुए शोक संदेश जारी किया।
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन
मरजा-ए-आली-क़द्र, फ़क़ीह-ए-अहल-ए-बैत-ए-इस्मत व तहारत अलैहिमुस्सलाम, आयतुल्लाह अल-हाज सैय्यद मूसा शुबैरी ज़ंजानी रिज़वानुल्लाहि अलैह की रेहलत एक अलमनाक मुसीबत और अज़ीम ख़सारा है।
मरहूम जलीलुल क़द्र ने अपनी तमाम बाबरकत उम्र तहक़ीक़ और तदरीस में गुज़ारी, वह अकाबिर उलमा-ए-आलाम में से थे, क़ुम मुक़द्दसा के मुबारक इल्मी हौज़ा के बड़े अरकान में से थे और आलिम-ए-रब्बानी की रौशन मिसाल थे।
उनके गिरांक़द्र इल्मी आसार और दीगर दीनी ख़िदमात एक क़ीमती विरसे के तौर पर बाक़ी रहेंगी, इसी तरह उनका तरीक़ा-ए-कार और अमली सीरत हमेशा अहल-ए-इल्म के लिए एक नफ़ीस सरमाये के नमूने के तौर पर बाक़ी रहेगी।
अल्लाह तआला मरहूम व मग़फ़ूर के दरजात बुलंद फ़रमाए और उन्हें उनके पाक व पाकीज़ा आबा-ओ-अजदाद के साथ महशूर फ़रमाए।
मैं इस अज़ीम मुसीबत पर इंतिहाई रंज व अफ़सोस के साथ हज़रत वली-ए-अस्र अरवाहुना फ़िदाह की मुक़द्दस बारगाह, हौज़ात-ए-इल्मिया, मरहूम के मोहतरम अहल-ए-ख़ाना, ख़ुसूसन उनके अज़ीज़ व गिरामी फ़रज़ंदान और तमाम मोमिनीन की ख़िदमत में ताज़ियत पेश करता हूँ, और अल्लाह तआला से सबके लिए सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-जज़ील का तलबगार हूँ।
व ला हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम
9 रबीउल-आख़िर 1448 हिजरी
अली अल-हुसैनी अस-सीस्तानी
नाशिर : शोबा-ए-इस्तेफ़्ताआत, दफ़्तर नुमाइंदगी आयतुल्लाहिल उज़्मा सीस्तानी द०ज़ि०, बाबुन नजफ़, सज्जाद बाग़ कॉलोनी, लखनऊ
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