हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए मदरसा इल्मिया तखस्सुसी मुज्तहिदा अमीन की निदेशक मोहतरमा नाहिद कासिमपुर ने कहा कि नए शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश करना एक नई यात्रा की शुरुआत के समान है। यह ऐसी यात्रा है, जो ज्ञान प्राप्त करने, कुछ हासिल करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए शुरू होती है।
उन्होंने आगे कहा कि मदरसों में यह यात्रा केवल कुछ किताबें पढ़ने और कुछ शैक्षणिक चरण पूरे करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह मनुष्य की ज्ञान से पहचान, पहचान से आचरण और आचरण से समाज पर प्रभाव डालने की दिशा में यात्रा है।
मदरसा इल्मिया तखस्सुसी मुज्तहिदा अमीन की निदेशक ने सूरह ताहा की आयत 114, "और कहिए: ऐ मेरे पालनहार! मेरे ज्ञान में वृद्धि कर", का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयत छात्र जीवन के लिए सबसे सुंदर मार्गदर्शक है। अर्थात एक छात्र को हमेशा विकास की अवस्था में रहना चाहिए। उसके ज्ञान, अंतर्दृष्टि, नैतिकता, ईमान और जनसेवा में लगातार वृद्धि होनी चाहिए।
उन्होंने पैगंबर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम) के इस कथन की ओर भी संकेत किया कि "ज्ञान प्राप्त करना हर मुसलमान पर अनिवार्य है।" उन्होंने हज़रत इमाम अली (अलैहिस्सलाम) के इस कथन को भी बयान किया कि "ज्ञान धन-दौलत से बेहतर है", क्योंकि ज्ञान तुम्हारी रक्षा करता है, जबकि तुम्हें अपने धन की रक्षा करनी पड़ती है। इसके बाद उन्होंने इन सिद्धांतों पर जोर दिया।
मोहतरमा कासिमपुर ने आगे कहा कि हौज़ा इल्मिया में शिक्षा प्राप्त करना कोई गौण या अतिरिक्त विषय नहीं है। जो छात्र शिक्षा और अध्ययन को गंभीरता से नहीं लेता, वह अपनी जिम्मेदारी और मिशन में कमी का शिकार हो जाता है, क्योंकि जो व्यक्ति स्वयं किसी मार्ग पर पूरी तरह अधिकार नहीं रखता, वह दूसरों के लिए मार्गदर्शक और हिदायत का माध्यम नहीं बन सकता। इसलिए सफल छात्र जीवन वास्तव में अध्ययन और आत्मशुद्धि, अंतर्दृष्टि और नैतिकता, विशेषज्ञता और आध्यात्मिकता तथा ज्ञान और आचरण का समन्वय है।
आपकी टिप्पणी