मंगलवार 29 सितंबर 2026 - 12:01
अर्जेंटीना में मकतब-ए-अहलेबैत (अ) और हुसैनी आंदोलन को जानने मे मुसलमानो की गहरी रुचिः अल करबासी

आयतुल्लाह मुहम्मद सादिक़ मुहम्मद अल-करबासी ने कहा कि अर्जेंटीना में मुसलमान और शिया समुदाय मकतब ब-ए-अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम और हुसैनी आंदोलन के बारे में वैज्ञानिक और धार्मिक जानकारी हासिल करने में गहरी रुचि रखते हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, दायरतुल-मआरिफ़ अल-हुसैनिया के लेखक और लंदन स्थित केंद्र अध्ययन-ए-हुसैनी के प्रमुख आयतुल्लाह शेख़ मुहम्मद सादिक़ मुहम्मद अल-करबासी ने लैटिन अमेरिका के हालिया दौरे के दौरान अर्जेंटीना के मुस्लिम और शिया समुदायों की धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियों तथा मकतब-ए-अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम में उनकी गहरी रुचि का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि उन्होंने अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में विभिन्न इस्लामी केंद्रों और हुसैनियों का दौरा किया और शिया तथा मुस्लिम समुदाय के लोगों से मुलाकात की। इन मुलाकातों से पता चला कि वहां धार्मिक, सांस्कृतिक और विशेष रूप से हुसैनी आंदोलन को समझने के प्रति असाधारण रुचि पाई जाती है।

आयतुल्लाह अल-करबासी ने बताया कि ब्यूनस आयर्स में एक इस्लामी कब्रिस्तान भी है, जहां सुन्नी, शिया और अलवी मुसलमानों की कब्रें मौजूद हैं और इसका प्रबंधन शिया लोगों के हाथ में है। उन्होंने कहा कि वहां सीरिया और लेबनान से संबंधित परिवार भी बसे हुए हैं, जिनमें कुछ परिवारों के प्रवास का इतिहास उस्मानी साम्राज्य के दौर तक पहुंचता है।

उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान जिस बात ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया, वह लोगों के सवालों की संख्या और विविधता थी। उनके अनुसार, लोग दिन-रात हुसैनी आंदोलन के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं और उनके सवाल केवल एक विषय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इस्लाम, आस्था, ज्ञान और विभिन्न विज्ञानों से भी संबंधित हैं।

आयतुल्लाह अल-करबासी ने बताया कि ब्यूनस आयर्स में शेख़ अब्दुलकरीम काज़िम, शेख़ अब्दुल्लाह और शेख़ मोहसिन धार्मिक सेवाएं अंजाम दे रहे हैं, जबकि शेख़ फैसल ‘सान मिगेल दे तुकुमान’ शहर में धार्मिक गतिविधियों में व्यस्त हैं।

उन्होंने आगे कहा कि दायरतुल-मआरिफ़ अल-हुसैनिया ने वहां के मुसलमानों में विशेष रुचि पैदा की है और लोग इसके विशाल वैज्ञानिक भंडार तथा कई जिल्दों पर आधारित होने को देखकर हैरान हुए। उनके अनुसार, इससे इस्लामी समाज में विद्वानों और शैक्षणिक केंद्रों से सीधे ज्ञानवर्धक संपर्क की आवश्यकता भी स्पष्ट होती है।

आयतुल्लाह अल-करबासी ने कहा कि कुछ लोग फिलिस्तीन के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त करते हैं, जबकि कुछ लोग इस्लामी गणराज्य ईरान की क्रांति के प्रति अपने समर्थन और उसकी सफलता के लिए दुआ करने की बात भी कहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इन लोगों में विश्व की घटनाओं को मूल स्रोतों से समझने और धार्मिक तथा शैक्षणिक जानकारी सीधे हासिल करने की इच्छा पाई जाती है।

उन्होंने बताया कि उनका लैटिन अमेरिका का दौरा जारी रहेगा और अगले चरण में ब्राज़ील में दो सप्ताह रहकर वहां के इस्लामी केंद्रों, मुसलमानों और पैरोवान-ए-अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम से मुलाकातें की जाएंगी।

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