शनिवार 19 सितंबर 2026 - 00:35
पश्चिमी सांस्कृतिक प्रभाव के दौर में इस्लामी पहचान, पवित्रता और हया की रक्षा जरूरी: मौलाना गौहर हुसैन

हुज्जतुल इस्लाम मौलाना गौहर हुसैन ने यागीपुरा, मागाम, जम्मू-कश्मीर में नमाज़-ए-जुमा के खुत्बे में "खुशहाल परिवार और उसके बुनियादी सिद्धांत" विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच इस्लामी पहचान, पवित्रता, हया और पारिवारिक मूल्यों की रक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपसी सम्मान, एक-दूसरे की गलतियों को माफ करना, पवित्रता और हिजाब तथा कुरआन और अहले बैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं पर अमल एक शांतिपूर्ण और खुशहाल परिवार की बुनियाद है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 18 सितंबर 2026 को यागीपुरा, मागाम, जम्मू-कश्मीर में नमाज़-ए-जुमा के खुत्बे में हुज्जतुल इस्लाम मौलाना गौहर हुसैन ने "खुशहाल परिवार और उसके बुनियादी सिद्धांत" विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक मजबूत, शांतिपूर्ण और खुशहाल परिवार कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर कायम होता है। इन सिद्धांतों पर अमल करके घर के माहौल को प्रेम, शांति और आपसी विश्वास का केंद्र बनाया जा सकता है।

आपसी सम्मान खुशहाल परिवार की बुनियाद

मौलाना गौहर हुसैन ने खुशहाल परिवार के पहले बुनियादी सिद्धांत के रूप में आपसी सम्मान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पति और पत्नी को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। आपसी इज्जत और सम्मान एक खुशहाल परिवार की बुनियादी जरूरत है। यदि घर के सदस्य एक-दूसरे की स्थिति, भावनाओं और अधिकारों का सम्मान करें तो परिवार की नींव मजबूत होती है और घर का वातावरण शांतिपूर्ण बना रहता है।

उन्होंने वैवाहिक जीवन के दूसरे महत्वपूर्ण सिद्धांत के रूप में एक-दूसरे की गलतियों को माफ करने और नजरअंदाज करने की भावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पति और पत्नी दोनों में एक-दूसरे की गलतियों और कमियों को माफ करने, दरगुजर करने और छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करने का हौसला होना चाहिए। हर इंसान से गलती हो सकती है, इसलिए माफी और दरगुजर घर के सुकून को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हया, पवित्रता और हिजाब की अहमियत

खुत्बा-ए-जुमा में मौलाना गौहर हुसैन ने पवित्रता, हया और हिजाब के विषय पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने हजरत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा को महिलाओं के लिए पवित्रता, हया और पाकीजगी का बेहतरीन नमूना बताते हुए कहा कि वर्तमान दौर में महिलाओं को अपने जीवन में हजरत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की सीरत को आदर्श बनाना चाहिए।

उन्होंने वर्तमान सांस्कृतिक परिस्थितियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि हमारे समाज और संस्कृति पर पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में अपनी इस्लामी पहचान, हया और पवित्रता की रक्षा के लिए हजरत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की सीरत से मार्गदर्शन लेना जरूरी है।

कुरआन की दो महान आदर्श हस्तियां

मौलाना गौहर हुसैन ने कुरआन की रोशनी में हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम और हजरत मरियम अलैहस्सलाम का उल्लेख करते हुए उन्हें पवित्रता, पाकदामनी और हया के उज्ज्वल उदाहरण के रूप में पेश किया।

उन्होंने कहा कि इन महान हस्तियों का जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि इंसान प्रतिकूल और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी पवित्रता, चरित्र और हया की रक्षा कर सकता है। परिस्थितियां चाहे कितनी ही कठिन क्यों न हों, मजबूत ईमान और उच्च चरित्र इंसान को गलत रास्ते से बचा सकते हैं।

परिवार और समाज के निर्माण में महिला की भूमिका

खुत्बा-ए-जुमा में महिला के सामाजिक और पारिवारिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मौलाना ने कहा कि एक महिला अपने घर की अच्छी परवरिश और प्रशिक्षण के माध्यम से पूरे समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

एक नेक, हयादार और अच्छे चरित्र वाली महिला बेहतर पीढ़ी और अच्छे समाज के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाती है। इसके विपरीत नैतिक और सामाजिक मूल्यों से दूरी का समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इस संबंध में मौलाना गौहर हुसैन ने हजरत मूसा अलैहिस्सलाम और बलअम बाउरा से संबंधित ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई दुश्मन किसी समाज को नैतिक रूप से कमजोर करना चाहता है तो उसके पवित्रता और हया के मूल्यों को भी निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि इस घटना से समाज की नैतिक सुरक्षा और महिलाओं की पवित्रता तथा हया की रक्षा के महत्व को समझा जा सकता है।

कुरआन की स्पष्ट हिदायत

खुत्बे के अंत में मौलाना गौहर हुसैन ने सूरह अहज़ाब की आयत 59 और उससे संबंधित आयतों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कुरआन ने इंसान के लिए जीवन जीने का स्पष्ट मार्ग बताया है। हमें चाहिए कि कुरआन की शिक्षाओं को अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जिंदगी में व्यावहारिक रूप से लागू करें।

उन्होंने कहा कि खुशहाल परिवार केवल आर्थिक सुविधा और भौतिक सुख-सुविधाओं से नहीं बनता। इसके लिए आपसी सम्मान, एक-दूसरे की गलतियों को माफ करने की भावना, पवित्रता, हिजाब और इस्लामी मूल्यों की पाबंदी जरूरी है।

यदि परिवार कुरआन और अहले बैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं तथा हजरत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की सीरत को अपनी जिंदगी का आदर्श बनाए तो घर में शांति, प्रेम और खुशहाली पैदा हो सकती है।

मौलाना गौहर हुसैन ने कहा कि मजबूत और नेक परिवार ही एक अच्छे चरित्र वाले और नेक समाज की बुनियाद होता है। इसलिए परिवार की नैतिक और धार्मिक परवरिश पर ध्यान देना वास्तव में पूरे समाज की सुधार और निर्माण की नींव मजबूत करना है।

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