हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, यह परंपरा "तोहफ़ुल उक़ूल" पुस्तक से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
قال الامام الصادق علیه السلام:
اَلْعالِمُ بِزَمانِهِ لا تَهْجُمُ عَلَیْهِ اللَّوابِسُ.
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने फ़रमायाः
जो व्यक्ति अपने समय को जानता है और उसकी मांग को समझता है, वह कभी संदेह का शिकार नहीं होता।
तोहफ़ुल उक़ूल, पेज 356
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