गुरुवार 27 मार्च 2025 - 22:33
यौम अलकुद्स; उम्मत ए इस्लामी की एकता और मज़लूमों की हिमायत का प्रतीक है। हुज्जतुल इस्लाम अली रूस्तमियानी

हौज़ा / हौज़ा इल्मिया ख़ुरासान के निदेशक हुज्जतुल इस्लाम अली रूस्तमियानी ने यौम-ए-कुद्स के मौके पर बातचीत करते हुए कहा कि यह दिन प्रतिरोध (मुक़ावमत) और इस्लामी जागरूकता का प्रतीक है। मुसलमानों के लिए यह एक अवसर है कि वे इमाम खुमैनी र.ह. के विचारों को फिर से जीवंत करें।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार,हौज़ा इल्मिया ख़ुरासान के निदेशक हुज्जतुल इस्लाम अली रूस्तमियानी ने यौम-ए-कुद्स के मौके पर बातचीत करते हुए कहा कि यह दिन प्रतिरोध (मुक़ावमत) और इस्लामी जागरूकता का प्रतीक है। मुसलमानों के लिए यह एक अवसर है कि वे इमाम खुमैनी र.ह. के विचारों को फिर से जीवंत करें और दुनिया के दबे कुचले लोगों खासतौर पर मजलूम फ़िलिस्तीनी जनता के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करें।

उन्होंने सूरह निसा की आयत 75 का हवाला देते हुए कहा,और तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की राह में और उन कमज़ोर पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों के बचाव के लिए युद्ध नहीं करते?

हुज्जतुल इस्लाम रूस्तमियानी ने कहा कि क़ुरआन की इन शिक्षाओं के अनुसार, मुसलमानों पर यह अनिवार्य (वाजिब) है कि वे ज़ुल्म और साम्राज्यवाद (इस्तेकबार) के खिलाफ़ उठ खड़े हों और इज़राइली आक्रामकता पर खामोश न रहें।

उन्होंने विद्यार्थियों और उलमा को संबोधित करते हुए कहा कि यौम-ए-कुद्स की रैली में सक्रिय भागीदारी न केवल क्रांतिकारी मूल्यों से जुड़े होने की निशानी है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण भी है, ताकि वे इस्लामी सिद्धांतों और मानव गरिमा की रक्षा में अपनी भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा,हम इस राह में जो भी क़दम उठाते हैं, वह इस्लामी मूल्यों और मानवता की महानता के बचाव का प्रतीक होता है। हमारा हर शख्स, चाहे वह धार्मिक मूल्यों का संरक्षक हो या राष्ट्रीय हितों का रक्षक, इस वैश्विक आंदोलन में शामिल होकर दुनिया को यह संदेश देता है कि उम्मत-ए-मुस्लिमा कभी भी जुल्म के आगे नहीं झुकेगी।

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