हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, यह रिवायत "नहजुल फ़साहा" पुस्तक से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
قال رسول اللہ صلی اللہ علیہ وآلہ:
اُلهُو وَالْعَبوا فَإنّی أکْرَهُ أنْ یُریٰ فی دینِکُمْ غَلظَةً.
पवित्र पैगम्बर (स) ने फ़रमाया:
मौज-मस्ती और सकारात्मक गतिविधियों में संलग्न रहें, क्योंकि मुझे आपके धर्म में कठोरता और दुरुश्ती देखना पसंद नहीं है।
नहजुल फ़साहा, पेज 259
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