हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, बुशहर के गनावे शहर के इमाम जुमआ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद अब्दुलहादी रुकनी हुसैनी ने 12 फरवर्दीन के अवसर पर एक संदेश में कहा, इस्लामी गणतंत्र दिवस एक स्वतंत्र राष्ट्र की आज़ादी और स्वाधीनता का प्रमाण है।
जिसने अपने पवित्र लक्ष्यों को पाने के लिए अथक संघर्ष किया और शहीदों के खून के बल पर दुनिया के मजलूमों के दिलों में उम्मीद की रौशनी जगाई।
उन्होंने इस्लामी क्रांति के महान वास्तुकार के शब्दों को याद करते हुए कहा,इस दिन को 'उम्मत की इमामत का दिन', 'राष्ट्र की जीत का दिन, 'अल्लाह की पहली हुकूमत' और हमारे सबसे बड़े धार्मिक व राष्ट्रीय त्योहारों में से एक बताया गया, जिसे हमेशा जीवित रखना चाहिए। यह शब्द इस ऐतिहासिक दिन की महानता को दर्शाते हैं।
हुज्जतुल इस्लाम रुकनी हुसैनी ने कहा,12 फरवर्दीन वह दिन है जब इस देश के लोगों की सच्ची पहचान सामने आई, जब इस्लामी गणतंत्र का जन्म हुआ और उन हजारों शहीदों का खून रंग लाया, जिन्होंने इस्लामी न्याय व्यवस्था के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।
उन्होंने नववर्ष और रमज़ान के इबादतों की क़ुबूलियत की दुआ करते हुए 12 फरवर्दीन के पवित्र दिन को ईरान की महान जनता और खासतौर पर गनावे के निवासियों को मुबारकबाद दी।
साथ ही उन्होंने कहा,मुझे उम्मीद है कि इस साल जिसे हमारे महान नेता हज़रत इमाम ख़ामेनेई (र.ह) ने 'उत्पादन के लिए निवेश का वर्ष' नाम दिया है, हम राष्ट्रीय उत्पादन को मजबूत करने और देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा सकेंगे।
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