शनिवार 5 अप्रैल 2025 - 21:52
अहले बैत अ.स. के दुश्मन उनसे दुश्मनी पर एकजुट हैं।मौलाना सैयद अहमद अली आबिदी

हौज़ा / अहले बैत अ.स.से दुश्मनी कोई नई नहीं है, बल्कि बहुत पुरानी है। आज भी आप गौर करें कि दुनिया वाले किसी बात पर सहमत हों या न हों, लेकिन ये दुश्मने अहले बैत, अहले बैत अ.स.से दुश्मनी पर ज़रूर एकजुट हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मुंबई / खोजा शिया अशना अशरी जामा मस्जिद पाला गली में 4 अप्रैल 2025 को नमाज़-ए-जुमआ हुज्जतुल इस्लाम वाल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अहमद अली आबिदी की इक़्तिदा में अदा की गई। 

मौलाना सैयद अहमद अली आबिदी ने नमाज़ियों को संबोधित करते हुए फरमाया,खुदावंदे आलम आप सभी की उन सभी नमाज़ों, रोज़ों, दुआओं और नेक अमलों को कुबूल फरमाए, जो आपने रमज़ानुल मुबारक में अंजाम दिए हैं और इन सभी चीज़ों को आपकी आख़िरत का ज़खीरा बनाए।

अल्लाह का शुक्र है कि उसने हम गुनहगारों को एक महीना अपना मेहमान बनाया, ताकि हम उससे दुआ कर सकें, उसे पुकार सकें। जिस तरह अल्लाह ने हमारी कोताहियों के बावजूद हमें अपना मेहमान बनाया, उसी तरह दुआ है कि वह हमारे अमल को भी कुबूल फरमाए। हमें गुनाहों से दूर रहने की तौफीक़ अता फरमाए।

मौलाना ने ज़ोर देते हुए कहा,खुदा की बारगाह में दुआ है कि वह आने वाले साल को हमारे इमामे ज़माना (अ.ज.फ.श.) के ज़हूर का साल बनाए। क्योंकि अब यह देखा नहीं जाता कि इमाम अली अ.स. के मानने वाले, अहले बैत अ.स.के चाहने वाले इस तरह क़त्ल किए जाएँ, और उनके दुश्मन इस तरह आराम से रहें कभी तो वह दिन भी आए जब हम अहले बैत (अ.स.) का परचम सरबुलंद देखें कभी वह भी दिन आए जब हम अहले बैत (अ.स.) को मुस्कुराते हुए देखें।

मौलाना ने अहले बैत अ.स.की शहादत और मज़लूमियत को बयान करते हुए फरमाया,हमारे आइम्मा (अ.स.) एक के बाद एक क़त्ल किए गए, शहीद किए गए और जब अल्लाह तआला ने अपनी हिकमत से हमारे आख़िरी इमाम को ग़ैबत में रखा ताकि कोई उन्हें क़त्ल न कर सके, हालाँकि दुश्मन ने पूरी कोशिश की और कर रहे हैं कि उन्हें शहीद कर दें। चूँकि इमाम अ.स.तक पहुँच संभव नहीं है, इसलिए कोशिश हो रही है कि जहाँ भी इमाम (अ.स.) का चाहने वाला मिले, उसे क़त्ल कर दिया जाए सताया जाए।

मौलाना ने दुआ-ए-नुदबा के फ़क्र,रसूलुल्लाह (स.अ.व.व.) के बाद पूरी उम्मत अहले बैत (अ.स.) को सताने के लिए टूट पड़ी थी को बयान करते हुए फरमाया:अहले बैत (अ.स.) से दुश्मनी कोई नई नहीं है, बल्कि बहुत पुरानी है आज भी आप देखें कि दुनिया वाले किसी बात पर सहमत हों या न हों, लेकिन ये दुश्मने अहले बैत, अहले बैत (अ.स.) से दुश्मनी पर ज़रूर एकजुट हैं।

मौलाना ने आगे फरमाया,अहले बैत (अ.स.) से दुश्मनी इतनी शदीद है कि अगर कोई जानवर कहीं मारा जाता है तो उस पर सदाए एहतिजाज बुलंद होती है, लेकिन अगर अहले बैत (अ.स.) का कोई चाहने वाला बेगुनाह क़त्ल किया जाता है तो उस पर कोई आवाज़ नहीं उठती क़ातिल की मुख़ालफ़त नहीं की जाती।

मौलाना ने रसूल (स.अ.व.व.) के बाद हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) पर ढाए गए मसाइब का तज़किरा करते हुए फरमाया,हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) अपने बाबा के ग़म में जिस दरख़्त के नीचे बैठकर रोती और मातम करती थीं, दुश्मनों ने उस दरख़्त को भी काट दिया उसी तरह, वह दरख़्त जो रसूलुल्लाह (स.अ.व.व.) की दुआ से उगा और बड़ा हुआ, जिससे लोग बरकत हासिल करते थे उसे भी दुश्मनों ने काट दिया।

मौलाना ने शैख़ हंबली अबू मुहम्मद हसन बिन अली बरबहारी का ज़िक्र करते हुए फरमाया,उन्होंने 329 हिजरी में इमाम हुसैन (अ.स.) के मातम को हराम करार दिया। नतीजतन, जिन घरों में मातम होता था उनमें आग लगा दी गई, उन पर पत्थर बरसाए गए।

मौलाना ने अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद अकबर का नाम लेकर रिवायत बयान की कि उन्होंने रसूलुल्लाह (स.अ.व.व.) की ज़ियारत को हराम करार दिया। 

मौलाना ने इब्ने तैमिया का ज़िक्र करते हुए फरमाया,उसने तवस्सुल, शफ़ाअत और तबर्रुक का इनकार किया। लेकिन जब वह ख़ुद मर गए तो उनके ग़ुस्ल के पानी को उनके मानने वालों ने तबर्रुक के तौर पर पिया और अपने अमामे और रुमाल को उनके जनाज़े से मस किया।

मौलाना ने "सलफी" की वज़ाहत करते हुए फरमाया,सलफ यानी पुराने लोग, जो गुज़र गए, उन्हें सलफ कहते हैं। सलफी कहते हैं कि हम पुराने लोगों की सुन्नत पर अमल करते हैं। हाँ, यह सही कहते हैं, क्योंकि पुराने लोगों ने दरख़्त काटे, इन्होंने क़ब्र तोड़ी उन्होंने क़ब्रें तोड़ दीं। पुराने लोगों ने अहले बैत (अलैहिस्सलाम) को मारा, उन्होंने उनकी यादगारों को नष्ट कर दिया।

पुराने लोगों ने अहले बैत अलैहिस्सलाम को जेलों में रखा, और आज ये (सलफी) उनके चाहने वालों को सता रहे हैं। पुराने लोगों ने अहले बैत को मारा, और आज ये उनके चाहने वालों को मार रहे हैं

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