गुरुवार 5 फ़रवरी 2026 - 13:42
इमाम ज़माना अ.स.का दिल कैसे ख़ुश किया जाए?

हौज़ा / हक़ीक़ी मुन्तज़िर के ज़ेहन में हमेशा यह सवाल रहता है कि हम अपने इमाम हज़रत इमाम ज़माना (स.ल.) को किस तरह ख़ुश कर सकते हैं। क्या इसके लिए किसी ख़ास और ग़ैर-मामूली अमल की ज़रूरत है, या आम ज़िंदगी में रहते हुए ही यह मक़सद हासिल किया जा सकता है?

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इसी सवाल का जवाब देते हुए अख़्लाक़ियात के मशहूर उस्ताद हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन फ़रजी ने हौज़ा न्यूज़ से गुफ़्तगू में कहा कि इमाम ज़मानाؑ ज़मीन पर हुज्जत-ए-ख़ुदा हैं और बंदों को सिरात-ए-मुस्तक़ीम पर चलाने वाले रहनुमा हैं।

जो शख़्स उनके बताए हुए रास्ते पर चलता है और ख़ुदा की इताअत इख़्तियार करता है, वह अपनी इस्तिताअत के मुताबिक़ इमामؑ के दिल को ख़ुश करता है।

उन्होंने वाज़ेह किया कि इमाम ज़माना स.ल.हमारी बंदगी, इबादत और इताअत से ख़ुश होते हैं, जबकि गुनाह, नाफ़रमानी और नफ़सानी ख़्वाहिशात की पैरवी उन्हें रंज पहुँचाती है।ख़ुलासा यह है कि इताअत इमामؑ को ख़ुश करती है और माअसियत उन्हें नाराज़ करती है।

हुज्जतुल इस्लाम फ़रजी ने रिवायात का हवाला देते हुए बताया कि आइम्मा अहले बैतؑ अपने मानने वालों के हालात से बाख़बर रहते हैं। हज़रत अलीؑ से मन्क़ूल है कि मोमिन की ख़ुशी और ग़म सबसे पहले अहले बैतؑ के दिल पर असरअंदाज़ होते हैं। इससे मालूम होता है कि मासूमीनؑ अल्लाह की फ़ैज़-रसानी का ज़रिया हैं और हमारे आमाल उनकी बारगाह में पेश किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी नेकियाँ इमाम ज़मानाؑ के लिए बाइस-ए-मसर्रत बनती हैं और वह हमारे लिए दुआ फ़रमाते हैं, जबकि गुनाह उनके दिल को रंज पहुँचाते हैं, लेकिन इसके बावजूद वह हमारे लिए मग़फ़िरत और हिदायत की दुआ भी करते हैं।

उन्होंने ज़ोर दिया कि अगर हम इमाम ज़मानाؑ को ख़ुश करना चाहते हैं, तो हमें अपनी ज़िंदगी को आमाल-ए-सालिहा, अच्छे अख़लाक़ और तक़वा से मुज़य्यन करना होगा और हर क़िस्म की नाफ़रमानी से बचना होगा।

आख़िर में उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला सबको नेक बंदा बनने, इमाम ज़मानाؑ के हक़ीक़ी मददगार बनने और अपने आमाल के ज़रिये उनके दिल को ख़ुश करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

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