हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , 22 बहमन महज एक ऐतिहासिक दिन नहीं है बल्कि एक जीवित संदेश, एक विचारधारा और एक स्थायी शिक्षा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब कोई क़ौम अपने मक़सद को पहचान ले दुश्मन को समझ ले, सब्र और स्थिरता का दामन थामे, समय पर कदम उठाए और एकता को अपना शिआर बना ले, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। इस्लामी इंक़ेलाब की सफलता वास्तव में इन्हीं सिद्धांतों का व्यावहारिक प्रतिरूप है, जो हमें क़ुरआन-ए-करीम में बार-बार नज़र आते हैं।
दुश्मन पहचान किसी भी आंदोलन की स्थिरता के लिए बुनियादी अहमियत रखती है। क़ुरआन स्पष्ट रूप से आगाह करता है कि दुश्मन केवल ज़ाहिरी नहीं होते, बल्कि वे विचारधारात्मक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूपों में भी हमला करते हैं।
इंक़ेलाब-ए-इस्लामी के रहनुमाओं और अवाम ने समय रहते पहचान लिया कि असली ख़तरा कौन है और उसकी साज़िशों का मुक़ाबला कैसे करना है। यही बसीरत 22 बहमन की कामयाबी की बुनियाद बनी।
स्थिरता वह क़ुरआनी सिद्धांत है, जिसके बगैर कोई जद्दोजहद फलदायी नहीं हो सकती। क़ुरआन फ़रमाता है कि अल्लाह उन लोगों के साथ है जो साबित क़दम रहते हैं। इंक़ेलाब के दौरान सख़्त दबाव, कुर्बानियाँ और मुश्किलें आईं, मगर अवाम ने हिम्मत नहीं हारी। यही सब्र और स्थिरता आखिरकार ज़ालिम निज़ाम के ख़ात्मे और हक़ की फ़तह का सबब बनी।
समय पर कदम उठाना भी क़ुरआन की एक अहम तालीम है। सही वक़्त पर सही फ़ैसला इतिहास का रुख बदल देता है। 22 बहमन इस बात की रोशन मिसाल है कि जब क़ियादत और अवाम ने एक पल गँवाए बगैर मैदान में क़दम रखा, तो ताग़ूती ताकतें रेत की दीवार साबित हुईं।
एकता इंक़ेलाब का सबसे मज़बूत सुतून थी। क़ुरआन हमें तफ़रके से बचने और अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थामने का हुक्म देता है। 22 बहमन के दिन क़ौम ने नस्ली, लिसानी और तबक़ाती इख़्तिलाफ़ात को बालाए ताक रखकर यकजिहती का मुज़ाहिरा किया और यही एकता एक अज़ीम मोजिज़ा बन गई।
अगर ग़ौर किया जाए, तो इस्लामी इंक़ेलाब बज़ाते-ख़ुद एक क़ुरआनी मोजिज़ा है। कम वसाइल, ज़ाहिरी कमज़ोरी और आलमी ताकतों की मुख़ालिफ़त के बावजूद एक बाइमान क़ौम का कामयाब होना इस बात का सबूत है कि जब क़ुरआनी उसूलों पर अमल किया जाए, तो अल्लाह की नुसरत शामिल-ए-हाल होती है।
22 बहमन हमें यह सबक देता है कि आज भी अगर हम दुश्मन को पहचानें, सब्र व स्थिरता अपनाएँ, समय पर कदम उठाएँ और एकता को मजबूत रखें, तो कोई ताकत हमें हरा नहीं सकती। यही इंक़ेलाब का पैग़ाम है, यही क़ुरआन की शिक्षा है और यही हमारी सफलता का रास्ता है।
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