हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हिंदुस्तान में वली फ़क़ीह के नुमाइंदे हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अब्दुलमजीद हकीम इलाही ने हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद अनीसुल हसन ज़ैदी के इंतिक़ाल पर एक ताज़ियती पैग़ाम जारी किया है।
शोक संदेश कुछ इस प्रकार है:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन
आलिम-ए-रब्बानी और मकतब-ए-अहले बैत अलैहिमुस्सलाम के ख़ादिम, मरहूम व मग़फ़ूर हज़रत हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद अनीसुल हसन ज़ैदी रज़वानुल्लाहि तआला अलैह के इंतिक़ाल की ख़बर सुनकर बेहद अफ़सोस हुआ।
मरहूम ने अपनी बाबरकत ज़िंदगी दीन की तहसील व तरवीज, मआरिफ़-ए-इस्लामी की इशाअत, शआइर-ए-इलाही के क़ियाम और इस्लामी मुआशरे की मुख़लिसाना ख़िदमत में गुज़ारी।
वह इख़लास, तक़वा और इल्म के हामिल थे और तालीम व तरबियत के मैदान में नमायां ख़िदमात अंजाम दीं। इमामत-ए-जुमा व जमाअत की ज़िम्मेदारियों को भी दयानत और एहसास-ए-ज़िम्मेदारी के साथ निभाया।
तालीमी नज़्म व ज़ब्त के तहफ़्फ़ुज़ और शरई मसाइल की दुरुस्त वज़ाहत के लिए उनकी ख़ुसूसी तवज्जोह, उनके दीन से गहरी वाबस्तगी और मज़बूत अज़्म की आइना-दार थी।
बिला शुब्हा ऐसी बाकिरदार और ज़िम्मेदार शख़्सियत का फ़क़दान दीऩी मुआशरे के लिए एक दर्दनाक सानिहा है।
मैं मरहूम के अहल-ए-ख़ाना, शागिर्दों, मुतअल्लिक़ीन और तमाम मोमिनीन, ख़ुसूसन उनके फ़रज़ंद-ए-अर्जुमंद हज़रत हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सैयद नजीबुल हसन ज़ैदी की ख़िदमत में ताज़ियत पेश करता हूँ और बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हूँ कि अल्लाह तआला मरहूम के दर्जात बुलंद फ़रमाए और पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-अज़ीम अता फ़रमाए।
अब्दुलमजीद हकीम इलाही
नुमाइंदा-ए-वली फ़क़ीह हिंन्द

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