हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, भारत के प्रसिद्ध विद्वान और अंतर्राष्ट्रीय मुबल्लिग़ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना ज़हूर महदी मौलाई से हौज़ा न्यूज़ के पत्रकार ने मोहसिना ए इस्लाम हज़रत खदीजातुल कुबरा की वफ़ात दिवस पर एक विशेष इंटरव्यू लिया जोकि हज़रत ख़दीजा (स) की आध्यात्मिक महानता, त्याग, सब्र, विनम्रता और इस्लाम के लिए उनके अतुलनीय योगदान को उजागर करता है। जिसे हम अपने प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे है।
हौज़ाः हज़रत ख़दीजा (स) की सबसे पहली और महत्वपूर्ण विशेषता क्या थी?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः आपकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता गहरी पहचान और ज्ञान था। आपने आसमानी किताबों के अध्ययन और विद्वानों से लाभ उठाकर अल्लाह तआला और उनके अंतिम रसूल की सच्ची पहचान हासिल की थी। इसी ज्ञान के आधार पर आपने दुनिया की चमक-दमक को ठुकराकर मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) को अपना जीवनसाथी चुना।
हौज़ाःआपने विवाह के समय पैग़म्बर (स) के प्रति अपने आकर्षण का कारण क्या बताया था?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः आपने फ़रमाया था कि आप उनकी रिश्तेदारी, कबीले में सम्मान, अमानतदारी, उच्च चरित्र और सच्चाई की वजह से उनकी ओर आकर्षित हुईं।
हौज़ाः पैग़म्बर (स) के प्रति आपका व्यवहार कैसा था, जबकि आप स्वयं एक प्रतिष्ठित महिला थीं?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः आप अत्यंत विनम्र और आदरपूर्ण थीं। आपने स्वयं को पैग़म्बर (स) की दासी कहा और अपने घर को उनका घर घोषित किया।
हौज़ाः इबादत और आध्यात्मिक जीवन में आपने पैग़म्बर (स) का किस प्रकार सहयोग किया?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः आपने घर का माहौल इबादत के अनुकूल बनाया। जब पैग़म्बर (स) रमज़ान में ग़ारे हिरा में इबादत करते थे, तो आप खुशी-खुशी उनकी अनुपस्थिति सहन करती थीं और उनके लिए भोजन भेजती थीं।
हौज़ाः पैग़म्बर (स) के शुरुआती संघर्षों में आपका क्या योगदान था?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः जब पैग़म्बर (स) को अत्याचारों और विरोध का सामना करना पड़ा, तब आपने खुलकर उनके नबूवत के दावे की पुष्टि की और जीवनभर बिना शर्त समर्थन दिया।
हौज़ाः पैग़म्बर (स) के लिए आप किस प्रकार सुकून और राहत का जरिया बनीं?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः जब मक्का के काफ़िर पैगंबर (स) को कष्ट देते थे, तब आप उन्हें दिलासा देती थीं। आपके माध्यम से अल्लाह तआला उनके दुखों को कम करता था।
हौज़ाः आपकी आर्थिक स्थिति कैसी थी और आपने अपने धन का उपयोग कैसे किया?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः आप मक्का की सबसे अमीर महिलाओं में थीं। आपके व्यापार के लिए अस्सी हज़ार ऊँट और सैकड़ों गुलाम-दासियाँ थीं। लेकिन विवाह के बाद आपने अपना सारा धन इस्लाम की सेवा और पैग़म्बर (स) की सहायता में समर्पित कर दिया।
हौज़ाः अपने धन समर्पण की घोषणा किसने की और कहाँ की?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः आपके चाचा वरकाह इब्न नौफ़ल ने काबा के पास खड़े होकर ऐलान किया कि आपने अपना सारा माल मुहम्मद (स) के नाम कर दिया है।
हौज़ाः सामाजिक बहिष्कार के समय आपने किस प्रकार सब्र दिखाया?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः अबू तालिब की घाटी में आर्थिक और सामाजिक प्रतिबंधों के दौरान आपने सब्र और स्थिरता दिखाई, यहां तक कि पेड़ों के पत्ते खाकर गुज़ारा किया, लेकिन सच्चाई का साथ नहीं छोड़ा।
हौज़ाः आपकी वफ़ात किस महीने में आती है और उसका क्या महत्व है?
मौलाना ज़हूर महदी मौलाईः रमज़ान के दसवें दिन आपका वफ़ात दिवस मनाया जाता है। यह दिन इस्लाम की पहली समर्थक, त्याग और बलिदान की मिसाल, और ईमान वालों की माँ को याद करने का प्रतीक है।
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