हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा नासिर मकारिम शिराज़ी ने एक वीडियो संदेश जारी करके इस्लामी क्रांति की सफ़लता के शुरूआत मे दुशमनो के षडयंत्रो की ओर संकेत करते हुए कहाः उस समय हमारे पास न कोई संगठित पुलिस थी और ना ही कोई पूर्ण रूप से तय्यार सेना, इसलिए दुशमन ने समझा कि यह आखरी जर्ब लगाने का बेहतरीन अवसर है। उसने इराक़ी जनता को उकसाया और यह अनुमान लगाया कि ईरान कमज़ोर है और कुछ नही कर पाएगा।
उन्होने खुर्रम शहर मे बअसी अधिकारीयो के घमंड की एक घटना बयान करते हुए कहाः एक अधिकारी कहता था कि हम कल तेहरान मे होंगे, मगर उनका वह कल आठ साल मे परिवर्तित हो गया। वह इस समय मे कोई सफलता हासिल न कर सके, अंतः पराजित हुए और गिड़गिड़ा कर युद्ध विराम करने की अपील करने पर विवश हुए।
हज़रत आयतुल्लाह मकारि शिराज़ी ने वर्तमान स्थिति की थोपे गए युद्ध के समय से तुलना करते हुए कहाः मेरे प्रिया भाईयो और बहनो आज हमारी स्थिति उस समय से कही अधिक अच्छी है। हमारे मुजाहेदीन निरंतर दुशमन को जवाब दे रहे है अतः सबको दिल और जान से निश्चित रहना चाहिए और विश्वास रखना चाहिए कि इमाम ज़माना (अ) की मदद से सफलता हमारा भाग्य होगी, इंशाल्लाह।
उन्होने सशस्त्र सेना की शक्ति पर बल देते हुए कहाः जब हमारी सेना सिपाह और दूसरे सुरक्षा संगठन इतनी शक्ति और क्षमता रखते है कि वह भविष्य के बारे मे चिंतित नही। हमे पूरा विश्वास है कि वह दुश्मन को ऐसा पराजित करेंगे जैसा कि शहीद सुप्रीम लीडर ने फ़रमाया था, निश्चित रुप से दुशमन अपने किए पर पछताएगा।
मरजअ तक़लीद ने अँत मे कहाः मै अपनी ओर से निरंतर दुआ कर रहा हूँ और आप सबको भी दुआ करना चाहिए लेकिन साथ ही हमारी सेना भी मैदान मे अपना कर्तव्य पूर्ण ताकत से अंजाम दे।
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