गुरुवार 12 मार्च 2026 - 15:41
हज़रत अली (अ) का न्याय आज भी इंसानियत के लिए मिसाल हैंः मौलाना अली अब्बास ख़ान साहब

हौज़ा / ऐनुल हयात ट्रस्ट’ की ओर से इमाम हज़रत अली (अ.स.) की शहादत के ग़म में 20 रमज़ान को छोटा इमामबाड़ा हुसैनाबाद में रात 8:15 बजे एक मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना अली अब्बास ख़ान साहब ने ख़िताब किया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,लखनऊ,‘ऐनुल हयात ट्रस्ट’ की ओर से इमाम हज़रत अली (अ.स.) की शहादत के ग़म में 20 रमज़ान को छोटा इमामबाड़ा हुसैनाबाद में रात 8:15 बजे एक मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना अली अब्बास ख़ान साहब ने ख़िताब किया।

कार्यक्रम की शुरुआत कश्मीर के मशहूर क़ारी बशारत हुसैन साहब ने तिलावत-ए-क़ुरआन से की। उनकी तिलावत ने सभी लोगों को बहुत प्रभावित किया। इसके बाद मौलाना अली हादी साहब ने इमाम हज़रत अली (अ.स.) का वसीयतनामा पढ़ा और कहा कि हमें उसकी बातों पर अमल करना चाहिए। वसीयतनामे की छपी हुई कॉपियां भी वहां मौजूद लोगों को दी गईं।

अपने बयान में मौलाना अली अब्बास ख़ान साहब ने कहा कि दुनिया का हर इंसान इंसाफ चाहता है और कोई भी ज़ुल्म पसंद नहीं करता। लेकिन लोग इंसाफ को सही तरह से नहीं समझते। हर कोई अपनी सोच के हिसाब से इंसाफ की परिभाषा कर लेता है।

उन्होंने कहा कि इमाम हज़रत अली (अ.ल.) ने बताया कि इंसाफ का मतलब है हर चीज़ और हर व्यक्ति को उसका सही हक़ और सही जगह देना। अगर किसी को उसके हक़ से ज़्यादा या कम दिया जाए तो वह ज़ुल्म है। सबको बराबर देना इंसाफ नहीं है, बल्कि जिसकी जितनी काबिलियत है, उसे उसी के हिसाब से ज़िम्मेदारी और बदला मिलना ही असली इंसाफ है।

मौलाना ने यह भी बताया कि अल्लाह ने दुनिया में हर चीज़ को अलग बनाया है आंख का काम अलग है, हाथ का अलग, दिमाग का अलग। इसी तरह हर इंसान का काम अलग है। जब हर कोई अपना काम सही तरीके से करता है, तभी समाज में इंसाफ कायम होता है।

हज़रत अली (अ.स.) की रहमत और अनाथों से मोहब्बत का ज़िक्र करते हुए मौलाना ने कहा कि रमज़ान की 20 तारीख़ की सुबह कूफ़ा के अनाथ बच्चों को पता चला कि जो शख्स हर रात चुपके से उनके घर आकर मदद करता था, वह हज़रत अली (अ.स.) ही थे।

मजलिस के आखिर में लोगों ने नम आंखों से हज़रत अली (अ.स.) के उत्तराधिकारी इमाम मेहदी (अ.ल. की ख़िदमत में पुरसा पेश किया और हज़रत अली (अ.स.) को श्रद्धांजलि दी।

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