बुधवार 25 मार्च 2026 - 10:48
शहीद के खून से ऐसा नूर पैदा होता है जो देश और राष्ट्र के भविष्य को रोशन कर देता है।मौलाना काज़िम मेंहदी

हौज़ा / इमाम बारगाह हुसैनी मुबारकपुर में शहीद रहबर मोअज़्ज़म आयतुल्लाह ख़ामनेई और अन्य शहीदों की याद में शोक सभा और मजलिस-ए-अज़ा आयोजित की गई

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , अमलो, मुबारकपुर / शहादत के दीवाने, राह-ए-शहादत में सबक़त ले जाने वाले ही अल्लाह के करीबी बंदे होते हैं। शहीद के ख़ून से ऐसा नूर पैदा होता है जो मुल्क और मिल्लत के भविष्य को रोशन कर देता है। शहीद आयतुल्लाह ख़ामनेई ने राह-ए-शहादत पर चलकर कर्बला-ए-जदीद का निर्माण करके इतिहास रच दिया।

इन विचारों का इज़हार मौलाना डॉक्टर सैयद काज़िम मेंहदी उरूज जौनपुरी ने दिनांक 23 मार्च, दिन सोमवार रात 8 बजे, स्थान इमाम बारगाह हुसैनी (चट्टान) मुबारकपुर में शहीद रहबर मोअज़्ज़म आयतुल्लाह सैयद अली हुसैनी ख़ामनेई, ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख शहीद अली लारीजानी, पासदारान-ए-इंकिलाब-ए-इस्लामी के तहत बसीज फोर्सेज के प्रमुख शहीद अली रज़ा सुलेमानी और अन्य शहदा ए राह-ए-हक़ रज़वानुल्लाह अलैहिम अजमईन की याद में आयोजित शोक सभा और मजलिस-ए-अज़ा को संबोधित करते हुए किए।

मौलाना इब्ने हसन अमलवी, संस्थापक और संरक्षक हसन इस्लामिक रिसर्च सेंटर अमलो ने शोक सभा में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शहादत का जज़्बा सिर्फ सच्चे मुसलमानों में पाया जाता है, बाकी क़ौमें इस अज़ीम नेअमत से महरूम हैं। शहीदों के ख़ून से ही इस्लाम हमेशा फलता-फूलता रहा है और आज भी ईरान की शुजा और बहादुर शहीद-परवर क़ौम इसकी जीती-जागती ज़िंदा मिसाल है।

मौलाना मोहम्मद शाहिद रियाज़ी कर्बलाई ने कहा कि ख़ुदा से सच्चा प्यार करने वाले वही लोग हैं जो अपना सब कुछ उस पर निसार कर देते हैं। क़ुरआन-ए-मजीद में ख़ुदा से सच्ची क़ुर्बत और मुहब्बत का मापदंड तमन्ना-ए-मौत यानी शहादत को ठहराया गया है।

इस अवसर पर उलेमा, शोअरा और ख़िद्दमान व बानियान-ए-मजलिस व जलसा की खिदमत में शहीद रहबर मोअज़्ज़म आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामनेई की ख़ूबसूरत तस्वीर को यादगार के तौर पर 'मोमेंटो' पेश किया गया।

मजलिस ए अज़ा की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम-ए-रब्बानी से हुई, जिसे मौलाना हसन मोहम्मद ने अंजाम दिया। निज़ामत के फ़राइज़ मौलाना मोहम्मद शाहिद कर्बलाई ने अंजाम दिए। मेहमान ए ख़ास में मौलाना इब्ने हसन अमलवी वाएज़, मौलाना करार हुसैन अज़हरी, मौलाना ग़ुलाम पंजतन, मौलाना हसन रज़ा, मौलाना नसीर अल-मेहदी, मौलाना मिसम हैदर, मौलाना शेख मुर्तज़ा अंसारी और अन्य उलेमा व मोमिनीन ने कसीर तादाद में शिरकत की।

शोअरा-ए-अहले बैत अ.स.ख़ुर्शीद मुबारकपुरी, ज़फ़र नासिरी, अनीस मुबारकपुरी और कासिम अख्तर ने शहीद आयतुल्लाह ख़ामनेई और जुमला शोहदा ए राह-ए-हक़ को मंज़ूम ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किए। आख़िर में अंजुमन-ए-अंसार-ए-हुसैनी क़दीम के मातमी दस्ते ने नौहा-ख़्वानी और सीना-ज़नी पेश की।

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