हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,मशहद: रिज़वी इस्लामिक साइंसेज़ विश्वविद्यालय के प्राध्यापक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद महमूद मरवियान हुसैनी ने कहा कि शहीद नेता की अंतिम यात्रा में करोड़ों लोगों की भागीदारी इस्लामी क्रांति, विलायत-ए-फ़क़ीह और प्रतिरोध की विचारधारा के प्रति ईरानी जनता की निष्ठा का स्पष्ट प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि यह विशाल जनसैलाब उन मीडिया अभियानों का करारा जवाब है जो ईरानी जनता और प्रतिरोध आंदोलन के बीच दूरी दिखाने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह अभूतपूर्व जनभागीदारी शहीद नेता और इस्लामी क्रांति के आदर्शों के साथ जनता के नए संकल्प का प्रतीक है तथा यह दर्शाती है कि ईरानी जनता आज भी क्रांति के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है।
मरवियान ने कहा कि हाल के महीनों में कुछ लोगों ने विदेशी और ज़ायोनी मीडिया से प्रभावित होकर जनमत संग्रह की मांग उठाई थी, लेकिन तेहरान, क़ुम, मशहद और इराक़ में अंतिम यात्रा में उमड़ी विशाल भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता प्रतिरोध की विचारधारा और इस्लामी क्रांति के मूल्यों के साथ खड़ी है।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि "ईरान बनाम प्रतिरोध" का नैरेटिव वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनके अनुसार, ईरानी जनता एकजुट होकर विलायत-ए-फ़क़ीह के साथ खड़ी है और प्रतिरोध के मार्ग को जारी रखने तथा वैश्विक अहंकार का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि यह अंतिम यात्रा इस्लामी क्रांति की जीवंतता, शक्ति और निरंतरता का प्रतीक है तथा यह दिखाती है कि प्रतिरोध का मोर्चा कठिनाइयों के बावजूद पहले से अधिक मज़बूती के साथ आगे बढ़ रहा है।
मरवियान ने कहा कि यह जनसैलाब शहीद नेता द्वारा एक दृढ़, साहसी और क्रांति के आदर्शों के प्रति वफ़ादार पीढ़ी के निर्माण की सफलता का भी प्रमाण है, जो प्रतिरोध के मार्ग को पूरी शक्ति से आगे बढ़ाएगी।
उन्होंने अंत में कहा कि देश के अधिकारियों और ज़िम्मेदारों को इस ऐतिहासिक जनसमर्थन का सम्मान करना चाहिए और जनता के विश्वास, निष्ठा तथा सहयोग के अनुरूप कार्य करके उसकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना चाहिए।
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