हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरान के हौज़ा ए इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा अराफी ने 13 अप्रैल को तेहरान में हौज़ा ए इल्मिया तेहरान के प्रबंधकों, सहायकों और जिम्मेदार अधिकारियों की बैठक में बलाग़े मुबीन" शीर्षक से स्थापित युद्ध शिविर के संदर्भ में बात की।
उन्होंने इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैय्यद अली ख़ामेनेई की शहादत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस महान त्रासदी ने ईरानी राष्ट्र में निस्वार्थता, बलिदान और धैर्य की भावना को और मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि "रमज़ान युद्ध" के दौरान तेहरान की जनता ने धार्मिक नेतृत्व के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सामूहिक स्तर पर भरपूर एकजुटता का प्रदर्शन किया। उनके अनुसार, शिक्षकों, छात्रों, इमामों, धर्म प्रचारकों और खतीबों ने सार्वजनिक समारोहों में भाग लेने और क्रांति की रक्षा के मैदान में प्रभावी भूमिका निभाई।
आयतुल्लाह अराफी ने इस बात पर जोर दिया कि हौज़ा ए इल्मिया को चाहिए कि वह धार्मिक विद्वानों और छात्रों के अंदर धैर्य और निस्वार्थता की भावना को और बढ़ावा दें, क्योंकि यही वर्तमान युग की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि शैक्षिक और शोध गतिविधियाँ जारी रहेंगी, लेकिन तीसरे थोपे गए युद्ध और देश एवं क्रांति की रक्षा को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने तेहरान के कुछ मदरसों, सफ़ीरान-ए-हिदायत" और विशेषज्ञ केंद्रों की शैक्षिक और शोध उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि इन सफलताओं में प्रांतीय प्रबंधन केंद्र की भूमिका सराहनीय है।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों में विलायत-ए-फ़क़ीह की प्रणाली को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि ईरानी राष्ट्र की हालिया सफलताएँ शहीद नेता सैय्यद अली ख़ामेनेई की रणनीति और दूरदर्शिता का परिणाम हैं, इसलिए सभी पर यह आवश्यक है कि वे वली-ए-फ़क़ीह की आज्ञापालन को सुनिश्चित करें।
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