सोमवार 20 अप्रैल 2026 - 07:32
इस्लामी योद्धाओ या उनके प्रियजनों को कष्ट पहुँचाना

इमाम सादिक़ (अ) ने एक हदीस में इस्लामी योद्धाओ या उनके प्रियजनों को कष्ट पहुँचाने के बारे में इशारा किया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत 'अल-काफ़ी' किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः

عَنِ السَّکُونِیِّ عَنْ أَبِی عَبْدِ اللَّهِ ع قَالَ قَالَ النَّبِیُّ ص: مَنِ اغْتَابَ مُؤْمِناً غَازِیاً أَوْ آذَاهُ أَوْ خَلَفَهُ فِی أَهْلِهِ بِسُوءٍ نُصِبَ لَهُ یَوْمَ الْقِیَامَةِ فَیَسْتَغْرِقُ حَسَنَاتِهِ ثُمَّ یُرْکَسُ فِی النَّارِ إِذَا کَانَ الْغَازِی فِی طَاعَةِ اللَّهِ عَزَّ وَ جَلَ.

जो कोई भी किसी ईमानदार मुजाहिद (जिहाद करने वाले) की चुग़ली करे, या उसे कष्ट पहुँचाए, या उसकी अनुपस्थिति में उसके परिवार वालों के साथ बुराई करे, तो क़यामत के दिन उसके गुनहगार सामने लाकर खड़ा कर दिया जाएगा, फिर वह गुनहगार उसके सारे नेक कर्म खो देगा, इसके बाद वह खुद आग में डाल दिया जाएगा; बशर्ते कि वह मुजाहिद अल्लाह तआला की आज्ञाकारिता के मार्ग में जिहाद कर रहा हो।"

अल-काफ़ी, भाग 5, पेज 8

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