हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हरम मुतह्हर हज़रत मासूमा (स) के खतीब हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हबीबुल्लाह फ़रहज़ाद ने अपने भाषण के दौरान कहा, ज़िलक़ादा का महीना हराम महीनों में से है अतः लड़ाई-झगड़े, मतभेद और फूट को इस महीने में छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने कहा,इस महीने का केंद्र इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम हैं, इस महीने में इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की बहन का जन्म, इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का जन्म, एक रिवायत के अनुसार इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत, दहवुल अर्ज़ और इमाम जवाद अलैहिस्सलाम की शहादत हुई है।
हरम मुतह्हर हज़रत मासूमा सलामुल्लाह अलैहा के मुक़र्रर ने इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की एक हदीस बयान करते हुए कहा, खुदा और पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम के सबसे करीब वे लोग हैं जो जब दूसरों तक पहुँचते हैं तो सलाम करते हैं।
उन्होंने कहा, सबसे बुरी विशेषता और चरित्र अकड़ और घमंड है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम ने फ़रमाया कि सलाम करना मनुष्य में अकड़ और घमंड को समाप्त कर देता है।
हुज्जतुल इस्लाम फ़रहज़ाद ने कहा, दुश्मन का सबसे बड़ा हथियार मतभेद है, जो लोग फूट और मतभेद का आह्वान करते हैं, वे या तो सौ प्रतिशत दुश्मन के कारिंदे हैं या पूरी तरह से अज्ञानी हैं।
उन्होंने अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम की एक हदीस का हवाला देते हुए कहा: सावधान! तुम्हारे बीच फूट न पड़े क्योंकि यह पराजय का कारण बनता है, और जान लो कि खुदा का हाथ जमात के साथ है।
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