मंगलवार 26 मई 2026 - 18:59
अरफ़ा के दिन दूसरों के लिए दुआ करें

हौज़ा / आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने अपने एक बयान में अरफ़ा के दिन की आध्यात्मिक महानता और अहले बैत (अ.स.) के सच्चे अनुयायियों के नैतिक चरित्र की ओर इशारा करते हुए कहा कि धर्म के बुजुर्ग अरफ़ा के दिन अपने स्वार्थ के बजाय दूसरों, विशेषकर अहले बैत अ.स.के अनुयायियों के लिए दुआ किया करते थे।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने अपने एक बयान में अरफ़ा के दिन की आध्यात्मिक महानता और अहले बैत (अ.स.) के सच्चे अनुयायियों के नैतिक चरित्र की ओर इशारा करते हुए कहा कि धर्म के बुजुर्ग अरफ़ा के दिन अपने स्वार्थ के बजाय दूसरों, विशेषकर अहले बैत (अ.स.) के अनुयायियों के लिए दुआ किया करते थे।

उन्होंने कहा कि मरहूम शेख़ मुफ़ीद और अन्य बुजुर्गों ने यह बात नकल की है कि कुछ बुजुर्ग साथी जब जबले अरफ़ात से वापस लौटते थे तो उनकी आँखें लगातार रोने के कारण लाल और आंसुओं से भरी होती थीं। जब उनसे पूछा जाता कि आप इतना क्यों रो रहे हैं जबकि परमात्मा "अरहमुर-राहिमीन" (सबसे अधिक दयावान) है, तो वह जवाब देते थे

हमने अपने लिए एक बूंद आँसू भी नहीं बहाया, बल्कि केवल अपने दोस्तों और अहले बैत (अ.स.) के अनुयायियों के लिए दुआ की है।

आयतुल्लाह जवादी आमोली ने कहा कि यह वास्तव में अहले बैत (अ.स.) की शिक्षाओं का प्रभाव था, क्योंकि रिवायतों में आया है कि जो व्यक्ति दूसरों की समस्या हल करता है या उनके लिए दुआ करता है, परमात्मा उसकी अपनी समस्याओं को कई गुना अधिक आसान कर देता है।

उन्होंने मोमिनीन को नसीहत दी कि अरफ़ा के दिन को केवल अपनी ज़रूरतों तक सीमित न रखें, बल्कि उम्मते मुस्लिमा, मज़लूमों, मोमिनीन और मानवता की भलाई के लिए भी दुआ करें, क्योंकि ईसार और दूसरों के लिए भलाई की कामना इस्लामी तालीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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