हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मुहर्रम 2026 के अवसर पर आयोजित इस मजलिस में मौलाना ने “समाज सुधार और इमाम हुसैन (अ) की शहादत के कारण” विषय पर विस्तार से बात की। उनके बयान को अलग-अलग समुदायों के लोगों ने ध्यान से सुना और सम्मान के साथ स्वीकार किया।
मौलाना ने कहा कि कर्बला की घटना केवल इतिहास नहीं है, बल्कि यह मानवता, नैतिकता, न्याय, स्वतंत्रता और समाज सुधार का एक स्थायी संदेश है। इमाम हुसैन (अ) ने अपनी कुर्बानी देकर यह सिखाया कि जब समाज में अन्याय, बुराई और धार्मिक कमजोरी फैल जाए तो उसके खिलाफ चुप रहना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम अच्छे अख़लाक का सबसे बेहतरीन उदाहरण थे और इमाम हुसैन (अ) ने उन्हीं नैतिक मूल्यों को अपने जीवन और व्यवहार से जीवित रखा। सच्चाई, ईमानदारी, माफ़ी, इंसानियत, न्याय और दया ऐसे गुण हैं जिन्हें पैगंबर ने फैलाया और इमाम हुसैन (अ) ने कर्बला में उनकी रक्षा के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी।
मौलाना ने कुरआन की शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन देता है। कुरआन इंसान को अच्छे आचरण, न्याय, आपसी सम्मान, सामाजिक जिम्मेदारी और साफ-सुथरे जीवन की शिक्षा देता है। कर्बला की घटना इन्हीं शिक्षाओं का व्यावहारिक उदाहरण है।
उन्होंने यह भी कहा कि इमाम हुसैन (अ) की शहादत के कारणों में समाज की उदासीनता, सत्य से दूरी, अन्याय के सामने चुप रहना, नैतिक गिरावट और धार्मिक मूल्यों की कमजोरी शामिल थी। अगर आज का समाज कर्बला के संदेश को समझ ले, तो नफरत, भ्रष्टाचार, अन्याय और बुराइयों को खत्म किया जा सकता है।
मौलाना ने कहा कि मुहर्रम का उद्देश्य केवल रोना-धोना नहीं है, बल्कि अपने आचरण और सामाजिक व्यवहार का आत्मविश्लेषण करना भी है। इमाम हुसैन (अ) की याद हमें बुराइयों से दूर रहने, अच्छाई को अपनाने, समाज में शांति और प्रेम फैलाने और एक अच्छा और सभ्य समाज बनाने की सीख देती है।
अंत में उन्होंने खासकर युवाओं से अपील की कि वे कुरआन और अहलेबैत (अ) की शिक्षाओं से जुड़े रहें, अच्छे नैतिक गुण अपनाएँ और समाज में प्रेम, भाईचारा, सहनशीलता और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। उपस्थित लोगों ने इस विचारपूर्ण और प्रभावशाली संबोधन को आज के सामाजिक हालात के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
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