गुरुवार 25 जून 2026 - 05:29
तुर्की के पूर्व संस्कृति मंत्री: अगर इमाम हुसैन (अ) बैअत कर लेते, तो इस्लाम की रूह ख़त्म हो जाती

अगर इमाम हुसैन (अ) यज़ीद के सामने झुक जाते और बैअत कर लेते, तो इस्लाम की हक़ीक़ी रूह समाप्त हो जाती। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ) ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपना जीवन, परिवार और अपनी सबसे प्रिय चीज़ों तक की कुर्बानी दे दी।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, इस्तांबुल के ज़ैनबिया मस्जिद एवं सांस्कृतिक केंद्र में मेहर्रम के अवसर पर एक मजलिस आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अहल-ए-बैत (अ) के चाहने वालो ने भाग लिया। कार्यक्रम में तुर्की के पूर्व संस्कृति मंत्री नामिक कमाल ज़ेयबेक, अहमद तुरगुत और मौलाना शेख सलाहुद्दीन ओज़गुन्दूज़ ने खिताब किया।

अपने खिताब में पूर्व संस्कृति मंत्री नामिक कमाल ज़ेयबेक ने कहा कि अगर इमाम हुसैन (अ) यज़ीद के सामने झुक जाते और बैअत कर लेते, तो इस्लाम की हक़ीक़ी रूह समाप्त हो जाती। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ) ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपना जीवन, परिवार और अपनी सबसे प्रिय चीज़ों तक की कुर्बानी दे दी।

अहमद तुरगुत ने हज़रत ज़ैनब (स) और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) के इल्म और शख्सियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हज़रत ज़ैनब (स) को कर्बला की घटना का पूर्वज्ञान था, जो उन्हें अपनी मा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की शिक्षाओं से प्राप्त हुआ था।

वहीं शेख सलाहुद्दीन ओज़गुन्दूज़ ने हज़रत ज़ैनब (स) की महान भूमिका को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कर्बला के बाद अपने साहस, धैर्य और प्रभावशाली भाषणों के माध्यम से अत्याचार और तानाशाही को चुनौती दी तथा आशूरा के संदेश को दुनिया तक पहुँचाया।

उन्होंने कहा कि हज़रत ख़दीजा (स), हज़रत फ़ातिमा (स) और हज़रत ज़ैनब (स) इस्लामी इतिहास की ऐसी महान हस्तियाँ हैं जिन्होंने समाज और इतिहास को नई दिशा दी।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने अहल-ए-बैत (अ) के मर्सिये सुने और इमाम हुसैन (अ) तथा कर्बला के शहीदों को ख़ेराज ए अक़ीदत पेश की।

तुर्की के पूर्व संस्कृति मंत्री: अगर इमाम हुसैन (अ) बैअत कर लेते, तो इस्लाम की रूह ख़त्म हो जाती

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