रविवार 5 जुलाई 2026 - 06:26
शहीद आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई प्रतिरोध और स्वतंत्रता के प्रतीक थे

हौज़ा / शहीद आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई के जनाज़े के समारोह के साथ ही, ट्यूनिशियाई कार्यकर्ताओं, विश्लेषकों और नागरिक हस्तियों के एक समूह ने प्रतिरोध अक्ष में उनके स्थान पर जोर देते हुए उन्हें दृढ़ता, स्वतंत्रता-खोज और उत्पीड़ित राष्ट्रों की रक्षा का प्रतीक बताया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , शहीद आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई के जनाजे की शुरुआत के बाद तूनिस में व्यापक प्रतिक्रियाएँ सामने आईं और सोशल नेटवर्क्स, सहानुभूति व्यक्त करने और उस व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने का मंच बन गए जिसे कई तूनिसी कार्यकर्ता प्रतिरोध और स्वतंत्रता-खोज के प्रतीक के रूप में याद करते हैं।

ट्यूनिशियाई नागरिक कार्यकर्ता 'ज़हबिया अल-फ़ाहिम' ने अपने बयानों में शहीद आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई के नेतृत्व के मूल्य पहलू पर जोर दिया और कहा कि उन्होंने शहादत की अवधारणा को एक हानि और अंत से 'आंदोलन और जागृति के लिए एक निरंतर परियोजना' में बदल दिया।

उनके अनुसार कई तूनिसियों की इस व्यक्तित्व के प्रति वफादारी, इस विश्वास से उत्पन्न होती है कि वह कमज़ोर/उत्पीड़ित वर्ग के मुख्य रक्षक थे और उनकी शहादत का अर्थ है, एक नैतिक दिशासूचक का खो जाना, जिसने स्वतंत्रता-प्रेमियों को प्रभुत्व-चाहने वाली शक्तियों के खिलाफ एकत्र किया था।

ट्यूनिशियाई शोधकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक 'हिशाम अल-हाजी' ने भी एक भू-राजनीतिक दृष्टिकोण के साथ शहीद आयतुल्लाहिल सैय्यद अली ख़ामेनेई को केवल ईरान का नेता नहीं माना बल्कि उन्हें प्रतिरोध का वास्तुकार बताया एक ऐसा वास्तुकार जिसने उनके अनुसार इस्लामी उम्मत के स्थान और सम्मान को पुनर्जीवित किया।

ट्यूनिशियाई कार्यकर्ताओं के अनुसार तूनिस गणराज्य के मुफ्ती के नेतृत्व में तूनिस के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की शहीद आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई के जनाजे में भागीदारी स्वतंत्र देशों की संप्रभुता को निशाना बनाने वाले कार्यों की निंदा को व्यक्त करती है और इस विश्वास को भी दर्शाती है कि प्रतिरोध के नेताओं की शहादत शहीद सैय्यद हसन नसरुल्लाह से लेकर शहीद आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई तक प्रतिरोध अक्ष की और अधिक मजबूती और स्थिरता का कारण बनेगी।

इन कार्यकर्ताओं ने यह भी जोर देकर कहा कि इस्लामी क्रांति के शहीद नेता का प्रत्यक्ष खतरों के बावजूद अपने सिद्धांतों और आदर्शों पर दृढ़ रहना उन पीढ़ियों के लिए एक आदर्श है जो निर्भरता और वर्चस्व-स्वीकृति के विरोधी हैं।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha