सोमवार 27 जुलाई 2026 - 13:10
आयतुल्लाह आराफ़ी और आयतुल्लाह राज़ी की मुलाक़ात, ईरान-इराक़ के मज़बूत संबंधों पर ज़ोर

हौज़ा / ईरान के हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने अरबईन के अवसर पर अपने इराक़ दौरे के दौरान आयतुल्लाह हाजी शेख़ हादी आल-राज़ी से मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात में ईरान और इराक़ की जनता के बीच मज़बूत संबंधों, इस्लामी एकता तथा हौज़ा-ए-इल्मिया की शैक्षणिक और धार्मिक गतिविधियों पर चर्चा हुई।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , आयतुल्लाह आराफ़ी ने इराक़ की सरकार, जनता, मराजे-ए-किराम, उलेमा और हौज़ा की हस्तियों का इस्लामी गणराज्य ईरान के समर्थन तथा विशेष रूप से "रहबर-ए-शहीद" के जनाज़े में बड़ी संख्या में शामिल होने पर आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि इराक़ी जनता की यह बड़ी भागीदारी दोनों भाई देशों के बीच गहरे भाईचारे, आपसी सहयोग और मज़बूत रिश्तों का प्रमाण है, जिसने दुश्मनों की फूट डालने की कोशिशों को नाकाम बना दिया।

आयतुल्लाह आराफ़ी ने हौज़ा-ए-इल्मिया की शैक्षणिक सेवाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि हौज़ा-ए-इल्मिया ईरान के प्रबंधन केंद्र ने समकालीन फ़िक़्ही विषयों पर 40 से अधिक खंडों में दर्स-ए-ख़ारिज़ के व्याख्यान प्रकाशित किए हैं। इनमें इस्लामी अर्थव्यवस्था, बैंकिंग, शेयर बाज़ार, शिक्षा का फ़िक़्ह, चिकित्सा का फ़िक़्ह और इस्लामी मानविकी जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

उन्होंने आगे बताया कि हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम की पुनर्स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम तथा मिर्ज़ा मुहम्मद हुसैन नाइनी की स्मृति में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धियाँ साबित हुए। इन सम्मेलनों में हौज़ा-ए-इल्मिया नजफ़ के वरिष्ठ विद्वानों ने भी भाग लिया।

आयतुल्लाह आराफ़ी ने बताया कि इन आयोजनों के परिणामस्वरूप आयतुल्लाहिल-उज़्मा शेख़ अब्दुल करीम हायरी और आयतुल्लाहिल उज़्मा मिर्ज़ा नाइनी की सेवाओं पर आधारित लगभग 80 खंडों के दो बड़े शैक्षणिक विश्वकोश भी प्रकाशित किए गए हैं।

इस अवसर पर आयतुल्लाह हाजी शेख़ हादी आल-राज़ी ने हौज़ा-ए-इल्मिया नजफ़ की शैक्षणिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ फ़िक़्ह, उसूल-ए-फ़िक़्ह, समकालीन फ़िक़्ह, तफ़सीर और इल्म-ए-कलाम की उच्च स्तरीय कक्षाएँ लगातार चल रही हैं।

उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति ईरान का समर्थन करना इस्लामी उलेमा की ज़िम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने ईरान पर हुए दुश्मनों के हमलों की कड़ी निंदा की और दुआ की कि अल्लाह तआला जिभा-ए-मुक़ावमत को विजय और सफलता प्रदान करे।

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