हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , लावरोव ने कहा कि मॉस्को खाड़ी क्षेत्र के संकट को लेकर सभी पक्षों के संपर्क में है और तत्काल युद्धविराम के प्रयासों का समर्थन कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जारी संकट समुद्री जहाज़ों की आवाजाही, अंतरराष्ट्रीय परिवहन और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
लावरोव ने बताया कि रूस, ईरान और अज़रबैजान के साथ मिलकर एक रेल संपर्क परियोजना पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के समुद्री मार्गों में तनाव के प्रभाव को कम करना है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ने रूस, खाड़ी क्षेत्र और हिंद महासागर को ईरान तथा अज़रबैजान के रास्ते जोड़ने वाले उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे के महत्व को और बढ़ा दिया है रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि रूस हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में युद्ध-पूर्व स्थिति की बहाली और तत्काल युद्धविराम का पक्षधर है।
उन्होंने यह भी बताया कि मॉस्को की योजना के तहत खाड़ी देशों और ईरान के बीच वार्ता शुरू कराने की कोशिश की जा रही है, जिसमें जॉर्डन, इराक, अरब लीग के सदस्य देशों, चीन, मिस्र और पाकिस्तान का समर्थन शामिल है।
लावरोव के अनुसार, ईरान ने भी बातचीत के लिए अपनी तत्परता जताई है, लेकिन कुछ पक्ष ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच संबंधों में सुधार की प्रक्रिया को विफल करने तथा तेहरान के विरुद्ध व्यापक मोर्चा बनाने का प्रयास कर रहा हैं।
उन्होंने अंसारुल्लाह की ओर से बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि यदि ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई जारी रही तो उसके प्रभाव लाल सागर तक फैल सकते हैं। ऐसी स्थिति में केवल तेल आपूर्ति ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
लावरोव ने कहा कि अमेरिका हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों की सामान्य आवाजाही को बहाल करना चाहता है, जो ईरान पर हमले से पहले सामान्य रूप से जारी थी।उन्होंने चेतावनी दी कि इस संकट का असर केवल प्रत्यक्ष पक्षों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के वे देश भी प्रभावित हो सकते हैं जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं।
रूसी विदेश मंत्री ने इज़राइल की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि वह दक्षिणी लेबनान और सीरिया में अपनी इच्छानुसार कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी तट में इज़राइल की नीतियाँ दो-राष्ट्र समाधान और स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना की संभावना को और कठिन बना रही हैं।
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