रविवार 9 अगस्त 2026 - 04:28
खुदा की इताअत या मख्लूक की नाराज़गी!

हौज़ा / हज़रत इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम ने एक रिवायत में अल्लाह तआला की पैरवी करने इस सिलसिले में लोगों की परवाह न करने की तरह इशारा किया हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस रिवायत को "तोहफ़ुल ओकूल" पुस्तक से लिया गया है। इस कथन का पाठ इस प्रकार है:

:قال الامام الہادی علیہ السلام

مَنْ اَطاعَ الخالِقَ لَمْ یُبالِ سَخَطَ المَخْلُوقینَ وَ مَنْ اَسْخَطَ الخالِقَ فَلْیَیْقَنْ ‌اَنْ یَحِّلَ بِهِ سَخَطُ المَخْلُوقینَ.

हज़रत इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम ने फरमाया:

जो आदमी ख़ुदा की अताआत या आज्ञा का पालन करता है, उसे मख़्लूक़ की नाराज़गी की परवाह नहीं होती। और जो ख़ालिक़ को नाराज़ करता है, उसे यक़ीन कर लेना चाहिए कि वह मख़लूक़ की नाराज़गी का भी सामना करेगा।

तोहफ़ुल  ओकूल,पेज 482 

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