हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सैयद अली ख़ामेनेई ने “इजारे पर रखे गए रोज़े की नीयत में शक” के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब दिया है, जिसे इच्छुक पाठकों की सेवा में प्रस्तुत किया जा रहा है।
इजारे पर रखे गए रोज़े की नीयत में शक
सवाल: 1- मैंने किसी मृत व्यक्ति की ओर से इजारे पर रोज़ा रखा। दोपहर से पहले रोज़ा जारी रखने के बारे में मुझे शक हुआ, लेकिन कुछ समय बाद और दोपहर होने से पहले मेरा शख दूर हो गया और मैंने रोज़ा जारी रखा। क्या मेरा रोज़ा सही है? इस रोज़े के बदले मुझे जो मेहनताना दिया जाएगा, क्या वह हलाल है?
2- अगर सुबह अज़ान के समय मुझे रोज़े की नीयत करना याद नहीं रहा, लेकिन अज़ान के बाद और दोपहर से पहले मुझे याद आया और मैंने नीयत की कि इस मृत व्यक्ति की ओर से इजारे पर रोज़ा रखूँ, तो क्या मेरा रोज़ा सही है?
जवाब: दोनों ही स्थितियों में इजारे पर रखा गया रोज़ा सही है और प्राप्त किया जाने वाला मेहनताना भी हलाल है।
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