रविवार 23 अगस्त 2026 - 08:56
शरई अहकाम | फोन कॉल और सोशल मीडिया पर सलाम का जवाब

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन फ़लाहज़ादेह ने फोन कॉल और मैसेजिंग ऐप्स में सलाम का जवाब देने के फिक़्ही हुक्म के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा: फोन पर किए गए सलाम का जवाब देना, चाहे सामान्य फोन कॉल हो या वीडियो कॉल, वाजिब है; लेकिन चैट में किए गए सलाम का जवाब देना शरई तौर पर वाजिब नहीं है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पूछे जाने वाले सवालों में से एक यह है कि क्या फोन कॉल या टेक्स्ट मैसेज में किए गए सलाम का जवाब देने का हुक्म एक जैसा है? हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन फ़लाहज़ादेह ने इस सवाल के जवाब में उन संपर्कों के बीच अंतर बताया है, जिनका हुक्म आमने-सामने मुलाकात जैसा है, और चैट के संदेशों के बीच।

सवाल: जो व्यक्ति फोन पर सलाम करे, क्या फिक़्ह की दृष्टि से उसके सलाम का जवाब देना वाजिब है? अगर चैट के माध्यम से सलाम किया जाए, तो उसका क्या हुक्म है?

जवाब: हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन फ़लाहज़ादेह ने हज़रत आयतुल्लाह शहीद ख़ामेनेई (र) के एक मुक़ल्लिद के फिक़्ही सवाल के जवाब में कहा:

सलाम का जवाब देना केवल आमने-सामने मुलाकात में वाजिब है, जहां व्यक्ति के मौजूद होने का हुक्म होता है; जैसे फोन पर संपर्क। अब चाहे वह वीडियो कॉल हो या सामान्य फोन कॉल।

ऐसी स्थिति में जब दूसरा व्यक्ति सलाम करता है, तो सलाम का जवाब देना वाजिब है। लेकिन इसके अलावा दूसरी स्थितियों में जवाब देना वाजिब नहीं है।

बहरहाल, अगर कोई व्यक्ति चैट में संदेश भेजकर सलाम करे, तो उसके सम्मान में उसका जवाब देना अच्छा है। लेकिन क्या जवाब न देने पर यह कहा जाएगा कि उसने कोई वाजिब काम छोड़ दिया? नहीं। सलाम का जवाब देना उस स्थिति में वाजिब है, जब आमने-सामने मुलाकात हो या ऐसी स्थिति हो जिसका हुक्म व्यक्ति की मौजूदगी जैसा हो, जैसे फोन पर बातचीत।

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