हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने «हलाल और हराम संगीत की सीमा» से संबंधित एक इस्तिफ़्ता का जवाब दिया है, जिसे पाठकों की सेवा में प्रस्तुत किया जा रहा है।
हलाल और हराम संगीत की सीमा
सवाल: हलाल और हराम संगीत की सीमा किस प्रकार निर्धारित की जा सकती है?
जवाब: वह हर संगीत जो अपनी विशेषताओं के कारण इंसान को अल्लाह तआला, आध्यात्मिकता और नैतिक गुणों से दूर करे तथा उसे बेशर्मी, निरर्थकता और गुनाह की ओर ले जाए, हराम है। इसकी पहचान और निर्धारण मुकल्लफ़ की समझ और प्रचलित दृष्टिकोण पर निर्भर है।
आपकी टिप्पणी