हौज़ा समाचार एजेंसी के अनुसार, धार्मिक विशेषज्ञ हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लेमीन नासिर रफीई ने पैग़म्बर हजरत मुहम्मद (स) और हजरत खदीजा (स) के विवाह की वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि हजरत खदीजा (स) का इस्लाम और पैगंबर (स) पर बहुत बड़ा अधिकार है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन आज के परिवारों के लिए जीवनसाथी के चयन, वैवाहिक सहयोग और परिवार के समर्थन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आदर्श है।
टेलीविजन कार्यक्रम ‘सम्त-ए-खुदा’ में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि हजरत खदीजा (स) की लज्जा, पवित्रता, ईमानदारी, बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता इस्लाम के आगमन के बाद पैदा हुए गुण नहीं थे, बल्कि पैग़म्बर (स) की पैग़म्बरी की घोषणा से पहले भी वे इन विशेषताओं से संपन्न थीं। उन्होंने कहा कि पैगंबर (स) और हजरत खदीजा (स) का विवाह उस समय हुआ, जब पैग़म्बर (स) की पैग़म्बरी की घोषणा में लगभग 15 वर्ष बाकी थे।
हुज्जतुल इस्लाम रफीई ने कहा कि हजरत खदीजा (स) आर्थिक रूप से बहुत संपन्न थीं, जबकि पैग़म्बर (स) उस स्तर की आर्थिक स्थिति नहीं रखते थे। इसके बावजूद उन्होंने धन को जीवनसाथी चुनने का आधार नहीं बनाया, बल्कि पैग़म्बर (स) के चरित्र, मानवता, बुद्धिमत्ता और नैतिक गुणों को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि आज के परिवारों को भी विवाह के मामले में केवल आर्थिक स्थिति को आधार नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पैग़म्बर (स) ने लगभग 25 वर्ष तक हजरत खदीजा (स) के साथ वैवाहिक जीवन बिताया। इस दौरान हजरत खदीजा (स) ने हर कठिन परिस्थिति में पैग़म्बर (स) का साथ दिया और अपना घर तथा धन इस्लाम के मार्ग में लगा दिया। पैग़म्बर (स) ने उनकी मृत्यु के बाद भी उन्हें हमेशा याद किया और उनके विशेष स्थान को स्वीकार किया।
धार्मिक विशेषज्ञ ने कहा कि इस्लाम के शुरुआती दौर में हजरत खदीजा (स) का सहयोग और त्याग अत्यंत महत्वपूर्ण था। वे पैग़म्बर (स) पर ईमान लाने वाली पहली महिलाओं में थीं और हजरत फातिमा (स) की माता थीं।
एकता सप्ताह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 12 से 17 रबीउल अव्वल तक मनाया जाने वाला यह सप्ताह मुस्लिम एकता को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आज मुसलमानों को पहले से अधिक एकता की आवश्यकता है और फिलिस्तीन तथा गाजा की स्थिति इस आवश्यकता को और स्पष्ट करती है।
हुज्जतुल इस्लाम रफीई ने आगे पैग़म्बर (स) की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक स्रोतों में उनकी अनेक विशेषताएं बयान हुई हैं। उनमें अंतिम पैग़म्बर होना, संक्षिप्त शब्दों में गहरी और व्यापक बातें व्यक्त करने की क्षमता, कुरआन का स्थायी चमत्कार, वैश्विक पैगंबरी, विशेष शफाअत और मेराज जैसी विशेषताएं शामिल हैं।
उन्होंने अंत में कहा कि पैग़म्बर (स) के जन्मदिवस के अवसर पर मुसलमानों को उनके व्यक्तित्व और जीवनशैली को अधिक समझना चाहिए तथा उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
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