हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, पैग़म्बर हजरत मुहम्मद (स) और हजरत खदीजा (स) का निकाह का खुत्बा हजरत अबू तालिब (अ) ने पढ़ा था। यह एकेश्वरवाद पर आधारित और नैतिक तथा ज्ञानवर्धक बातों से भरपूर भाषण था। इसमें हजरत इब्राहीम (अ) और हजरत इस्माईल (अ) के परिवार की महानता का उल्लेख करने के साथ-साथ पैगंबर हजरत मुहम्मद (स) के ऊंचे व्यक्तित्व और उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर भी संकेत किया गया था।
पैग़म्बर (स) और हजरत खदीजा (स) के निकाह का खुतबा पढ़ने वाले हजरत अबू तालिब (अ)
जब पैग़म्बर हजरत मुहम्मद (स) ने हजरत खदीजा बिन्त खुवैलिद (स) से विवाह के लिए उनके पिता या चाचा से बातचीत की, उस समय हजरत अबू तालिब (अ), जो अमीरुल मोमिनीन हजरत अली (अ) के पिता और पैग़म्बर (स) के चाचा थे, कुरैश के लोगों की सभा में आए। उन्होंने दोनों पक्षों की सहमति के बाद निकाह का खुतबा इस प्रकार शुरू किया:
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِی جَعَلَنَا مِنْ زَرْعِ إِبْرَاهِیمَ وَ ذُرِّیَّةِ إِسْمَاعِیلَ وَ جَعَلَ لَنَا بَیْتًا مَحْجُوجًا وَ حَرَمًا آمِنًا یُجْبَی إِلَیْهِ ثَمَرَاتُ کُلِّ شَیْءٍ وَ جَعَلَنَا الْحُکَّامَ عَلَی النَّاسِ فِی بَلَدِنَا الَّذِی نَحْنُ فِیهِ، ثُمَّ إِنَّ ابْنَ أَخِی مُحَمَّدَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ لَا یُوزَنُ بِرَجُلٍ مِنْ قُرَیْشٍ إِلَّا رَجَحَ وَ لَا یُقَاسُ بِأَحَدٍ مِنْهُمْ إِلَّا عَظُمَ عَنْهُ، وَ إِنْ کَانَ فِی الْمَالِ قَلَّ فَإِنَّ الْمَالَ رِزْقٌ حَائِلٌ وَ ظِلٌّ زَائِلٌ، وَ لَهُ فِی خَدِیجَةَ رَغْبَةٌ وَ لَهَا فِیهِ رَغْبَةٌ، وَ الصَّدَاقُ مَا سَأَلْتُمْ عَاجِلُهُ وَ آجِلُهُ مِنْ مَالِی، وَ لَهُ خَطَرٌ عَظِیمٌ وَ شَأْنٌ رَفِیعٌ وَ لِسَانٌ شَافِعٌ جَسِیمٌ.
"सारी प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने हमें हजरत इब्राहीम की संतान और हजरत इस्माईल की नस्ल में रखा। उसने हमारे लिए ऐसा घर बनाया, जिसकी ओर लोग हज के लिए आते हैं और ऐसा पवित्र तथा सुरक्षित स्थान बनाया, जहां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से तरह-तरह की चीजें और फल लाए जाते हैं। उसने हमारे शहर में हमें लोगों के बीच सम्मान और नेतृत्व प्रदान किया। इसके बाद मेरे भतीजे मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुल मुत्तलिब का किसी भी कुरैशी व्यक्ति से मुकाबला किया जाए तो वे उससे श्रेष्ठ साबित होंगे और किसी से उनकी तुलना की जाए तो वे उससे ऊंचे पाए जाएंगे। भले ही उनके पास धन कम है, लेकिन धन ऐसी चीज है जो हमेशा रहने वाली नहीं है। वह बदलने वाला धन और थोड़े समय के लिए रहने वाली छाया की तरह है। मुहम्मद को खदीजा में रुचि है और खदीजा को भी उनमें रुचि है। उनका महर वही होगा जो आप लोग तय करें, चाहे तुरंत दिया जाए या बाद में। इसकी जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। मुहम्मद महान व्यक्तित्व, ऊंचे पद और प्रभावशाली तथा दूसरों के लिए सिफारिश करने वाली जुबान के मालिक हैं।"
खुतबे के पाठ और विषय का विश्लेषण
1- इस खुतबे की विशेषता
यह खुतबा बहुत मजबूत, सुंदर और प्रभावशाली भाषा में लिखा गया है। प्रसिद्ध सुन्नी विद्वान और अरबी भाषा के विद्वान मुबर्रद ने इसे जाहिलियत के दौर के सबसे मजबूत खुतबों में बताया है। उनकी पुस्तक "अल-कामिल" में इसका उल्लेख मिलता है।
इब्ने-मगाज़ली ने भी इस खुतबे को जाहिलियत के दौर के बेहतरीन खुतबों में से एक बताया है।
इससे पता चलता है कि यह केवल विवाह की औपचारिक घोषणा नहीं थी, बल्कि इसमें धार्मिक, नैतिक और सामाजिक विचार भी शामिल थे।
2- हजरत अबू तालिब (अ) का खुतबा
यह सुंदर और अर्थपूर्ण खुतबा हजरत अबू तालिब (अ) ने पढ़ा था। वे पैग़म्बर हजरत मुहम्मद (स) के चाचा और उनके सबसे महत्वपूर्ण समर्थकों में से थे। वे हजरत अली (अ) के पिता भी थे।
प्रसिद्ध सुन्नी विद्वान आलूसी ने भी इस खुतबे को हजरत अबू तालिब (अ) से संबंधित होना सही माना है। एक अन्य प्रसिद्ध सुन्नी विद्वान इब्ने आशूर ने भी अपनी तफसीर में इस खुतबे की भाषा और उसकी सुंदरता का उल्लेख किया है।
3- खुतबे की शुरुआत अल्लाह की प्रशंसा से
हजरत अबू तालिब (अ) ने निकाह का खुतबा "अल्हम्दुलिल्लाह" अर्थात "सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है" से शुरू किया।
उन्होंने अल्लाह की प्रशंसा करते हुए कहा कि अल्लाह ने उनके परिवार को हजरत इब्राहीम (अ) और हजरत इस्माईल (अ) की नस्ल में रखा है। ये दोनों महान पैगंबर थे और लोगों को एकेश्वरवाद तथा केवल एक अल्लाह की इबादत का संदेश देते थे।
कुरआन में भी हजरत इब्राहीम (अ) और हजरत इस्माईल (अ) की महानता का उल्लेख किया गया है।
कुरआन में अल्लाह फरमाता है:
"कहो: हम अल्लाह पर ईमान लाए और उस पर भी जो हमारी ओर उतारा गया तथा जो इब्राहीम, इस्माईल, इसहाक, याकूब और उनकी संतान पर उतारा गया और जो मूसा, ईसा और दूसरे पैग़म्बरों को उनके पालनहार की ओर से दिया गया। हम उनमें से किसी के बीच अंतर नहीं करते और हम उसी के आज्ञाकारी हैं।" (सूरह आले इमरान, आयत 84)
एक दूसरे स्थान पर हजरत इस्माईल (अ) के बारे में कहा गया है:
"और इस किताब में इस्माईल का भी उल्लेख करो। निस्संदेह वह वादे का सच्चा था और रसूल तथा नबी था।" (सूरह मरयम, आयत 54)
हजरत इब्राहीम (अ) के बारे में भी कुरआन में कहा गया है:
"निस्संदेह इब्राहीम एक पूरी उम्मत के समान थे, अल्लाह के आज्ञाकारी और एकेश्वरवादी थे और वे मुश्रिकों में से नहीं थे।" (सूरह नहल, आयत 120)
इसलिए हजरत अबू तालिब (अ) को इस बात पर गर्व था कि उनका परिवार हजरत इब्राहीम (अ) और हजरत इस्माईल (अ) जैसे महान पैगंबरों की नस्ल से है। उन्होंने इसी वजह से सबसे पहले अल्लाह का शुक्र अदा किया।
4- पैग़म्बर (स) के महान व्यक्तित्व का उल्लेख
हजरत अबू तालिब (अ) ने इस खुतबे में अपने भतीजे हजरत मुहम्मद (स) के ऊंचे स्थान और महान व्यक्तित्व का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि कुरैश के किसी भी व्यक्ति से हजरत मुहम्मद (स) की तुलना नहीं की जा सकती। जब भी उनकी तुलना किसी दूसरे व्यक्ति से की जाएगी, तो वे उससे श्रेष्ठ ही पाए जाएंगे।
यह बात हजरत अबू तालिब (अ) की पैग़म्बर (स) के व्यक्तित्व, गुणों और भविष्य के बारे में गहरी समझ को दर्शाती है।
5- पैग़म्बर (स) के भविष्य की ओर संकेत
कुछ ऐतिहासिक और तफसीरी स्रोतों में हजरत अबू तालिब (अ) के खुतबे का एक और वाक्य भी मिलता है:
"और अल्लाह की कसम! इसके बाद उसके लिए एक बहुत बड़ी खबर और महान भविष्य है।"
लेख में बताया गया है कि इस वाक्य को कुछ सुन्नी विद्वानों की पुस्तकों में भी उद्धृत किया गया है, जैसे ज़मख्शरी की "अल-कश्शाफ" और "रबीउल-अबरार", अबू हय्यान की "अल-बहरुल मुहीत", खाज़िन की "लुबाबुत तावील", आलूसी की "रूहुल मआनी", इब्ने खल्दून का इतिहास और मक़रीज़ी की "इमताउल अस्मा"।
इस कथन से यह संकेत मिलता है कि हजरत अबू तालिब (अ) को पहले से पता था कि उनके भतीजे हजरत मुहम्मद (स) भविष्य में बहुत महान पद प्राप्त करेंगे और नबी बनेंगे। उस समय हजरत मुहम्मद (स) की उम्र लगभग 25 वर्ष बताई जाती है।
6- खुतबे का मुख्य धार्मिक संदेश
इस खुतबे में तीन महत्वपूर्ण बातें दिखाई देती हैं:
पहली, अल्लाह की एकता और केवल उसी की इबादत पर विश्वास।
दूसरी, पैग़म्बर हजरत मुहम्मद (स) की महानता और उनके उच्च व्यक्तित्व की पहचान।
तीसरी, हजरत मुहम्मद (स) के महान भविष्य और उनके पैगंबर बनने की ओर संकेत।
इस प्रकार, यह खुतबा केवल निकाह के अवसर पर पढ़े जाने वाला ख़ुत्बा नहीं था, बल्कि इसमें एकेश्वरवाद, पैगंबरी, नैतिकता, परिवार की महान परंपरा और पैग़म्बर (स) के महान व्यक्तित्व जैसे महत्वपूर्ण विषय भी शामिल थे।
सरल शब्दों में कहें तो, हजरत अबू तालिब (अ) ने पैगम्बर (स) और हजरत खदीजा (स) के निकाह के अवसर पर अल्लाह की प्रशंसा की, अपने परिवार की पैगंबरों से जुड़ी महान परंपरा का उल्लेख किया और हजरत मुहम्मद (स) की असाधारण महानता को सामने रखा। उनके शब्दों में यह संकेत भी मौजूद था कि मुहम्मद (स) का भविष्य सामान्य लोगों जैसा नहीं, बल्कि बहुत महान होने वाला है।
स्रोत:
- मन ला यहज़ुरुहुल फ़क़ीह, शेख सदूक, भाग 3, पृष्ठ 397
- अल-काफी, कुलैनी, भाग 5, पृष्ठ 374-375
- तज़किरतुल ख़वास, सब्त इब्ने जौज़ी, पृष्ठ 382
- तफसीर आलूसी, भाग 18, पृष्ठ 51
- रबीउल-अबरार, ज़मख्शरी, भाग 5, पृष्ठ 256
- अल-कश्शाफ, ज़मख्शरी, भाग 1, पृष्ठ 435
- अल-कामिल फिल-लुग़ा वल-अदब, मुबर्रद, भाग 4, पृष्ठ 4
- तारीख इब्ने खल्दून, भाग 3, पृष्ठ 5
- मनाकिब अली बिन अबी तालिब, इब्ने मगाज़ली, पृष्ठ 352
- रूहुल मआनी, आलूसी, भाग 9, पृष्ठ 251
- अत-तहरीर वत-तनवीर, इब्ने आशूर, भाग 2, पृष्ठ 353
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