हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लेमीन मुहम्मद हाज अबुलक़ासिम दूलाबी ने हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स) के पवित्र हरम में आयोजित “कुर्सी-ए-तिलावत-ए-फ़ातिमी” नामक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सूरह-ए-इंसान की आयतों की रोशनी में क़ुरआन की नज़र में श्रेष्ठ इंसान की विशेषताएँ बयान कीं।
उन्होंने कहा कि क़ुरआन करीम इंसान को ऊँचा स्थान और क्षमताओं वाला प्राणी बताता है, लेकिन अगर वह ईश्वरीय मार्ग से दूर हो जाए तो वह पतन की ओर भी जा सकता है। इसके विपरीत, अल्लाह के नेक बंदे इबादत और नेक कार्यों के माध्यम से इंसानियत के वास्तविक आदर्श बनते हैं।
इबादत; क़ुरआन की नज़र में इंसान की पहली विशेषता
हुज्जतुल इस्लाम हाज अबुलक़ासिम ने इबादत और अल्लाह तआला से लगातार संबंध को क़ुरआनी इंसान की बुनियादी विशेषता बताते हुए कहा कि सूरह-ए-इंसान के अंतिम भाग में सुबह-शाम अल्लाह को याद करने और रात में इबादत करने पर ज़ोर दिया गया है। पैग़म्बरे अकरम (स) का जीवन भी अल्लाह की बंदगी और शुक्रगुज़ारी की एक रोशन मिसाल है।
त्याग; सूरह-ए-इंसान का महत्वपूर्ण संदेश
उन्होंने त्याग को क़ुरआन की नज़र में इंसान की प्रमुख विशेषता बताते हुए अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ), हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) और हसनैन करीमैन (अ) द्वारा मिस्कीन, अनाथ और क़ैदी को खाना खिलाने के प्रसिद्ध वाक़ये की ओर संकेत किया।
उन्होंने कहा कि अहले-बैत (अ) ऊँचा सामाजिक स्थान रखने और पैग़म्बरे अकरम (स) से सीधा संबंध होने के बावजूद सादा और उदार जीवन बिताते थे और ज़रूरतमंद आसानी से उन तक पहुँच सकते थे।
उन्होंने आगे कहा कि हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों की परेशानियों को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। अहले-बैत (अ) की तरह सेवा भी केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए होनी चाहिए, न कि प्रशंसा और धन्यवाद की उम्मीद में।
अंत में उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि क़ुरआन की नज़र में इंसान को इबादत के साथ-साथ त्याग, सेवा और ज़रूरतमंदों की मदद को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
आपकी टिप्पणी