शुक्रवार 31 जुलाई 2026 - 20:10
मज़बूत ईमान के साथ माल और जान की राह में संघर्ष करना, क़ुरआन के अनुसार सबसे श्रेष्ठ व्यापार है

हौज़ा / आयतुल्लाह यसरबी मदरसे के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हबीबुल्लाह यूसुफ़ी ने कहा कि क़ुरआन ने जिस सबसे उत्तम व्यापार का परिचय कराया है, वह यह है कि इंसान अल्लाह और उसके रसूल पर दृढ़ ईमान रखे तथा अल्लाह की राह में अपने माल और जान के साथ संघर्ष करे। इसके बदले अल्लाह उसे जन्नत प्रदान करता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,आयतुल्लाह यसरबी मदरसे के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हबीबुल्लाह यूसुफ़ी ने कहा कि क़ुरआन ने जिस सबसे उत्तम व्यापार का परिचय कराया है, वह यह है कि इंसान अल्लाह और उसके रसूल पर दृढ़ ईमान रखे तथा अल्लाह की राह में अपने माल और जान के साथ संघर्ष करे। इसके बदले अल्लाह उसे जन्नत प्रदान करता है।

उन्होंने सूरह अस-सफ़ का हवाला देते हुए कहा कि अल्लाह ईमान वालों से पूछता है: क्या मैं तुम्हें ऐसे व्यापार की ओर मार्गदर्शन करूँ जो तुम्हें दर्दनाक यातना से बचा दे? अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और अल्लाह की राह में अपने माल और अपनी जान के साथ संघर्ष करो। यही तुम्हारे लिए सबसे बेहतर है, यदि तुम जानते हो।

यूसुफ़ी ने बताया कि सूरह अत-तौबा में भी यही विषय आया है, जहाँ अल्लाह फ़रमाता है कि उसने मोमिनों से उनकी जान और माल जन्नत के बदले खरीद लिए हैं। उनके अनुसार, इन आयतों से स्पष्ट होता है कि केवल ज़बानी दावा नहीं, बल्कि ऐसा मज़बूत ईमान चाहिए जो आवश्यकता पड़ने पर इंसान को अपने धन और जीवन तक का त्याग करने के लिए तैयार कर दे।

उन्होंने कहा कि इस "व्यापार" का लाभ गुनाहों की माफ़ी, जहन्नम से मुक्ति और हमेशा रहने वाली जन्नत की नेमतें हैं। उन्होंने शहीदों को इस व्यापार के सफल उदाहरण बताते हुए कहा कि उन्होंने अल्लाह के साथ यह सौदा किया और अनन्त जन्नत के अधिकारी बने।

अंत में उन्होंने इमाम अली (अ.स.) का नहजुल बलाग़ा का कथन उद्धृत किया,दुनिया अल्लाह के नेक बंदों का व्यापार-घर है। उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों के लिए दुनिया आख़िरत की खेती है। शहीद डॉ. मुहम्मद हुसैनी बेहिश्ती के कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा,जन्नत बहाने से नहीं, बल्कि उसकी कीमत अदा करके मिलती है।और जन्नत की वास्तविक कीमत ऐसा सच्चा ईमान है जो अल्लाह और उसके रसूल की खातिर माल और जान की कुर्बानी देने के लिए तैयार रहे।

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