हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आयतुल्लाह वहीद खुरासानी ने छात्रों और सैनिकों के साप्ताहिक आवागमन से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है, जिसे पाठकों की सेवा में प्रस्तुत किया जा रहा है।
सवाल: अगर कोई व्यक्ति विश्वविद्यालय में पढ़ाई या सैन्य सेवा आदि के लिए किसी दूसरे शहर में जाता है और सप्ताह के अंत में अपने वतन वापस लौट आता है, तो उसकी नमाज़ और रोज़े का क्या हुक्म है?
जवाब: इस मसले की कई स्थितियां हैं: पहली स्थिति: अगर वह व्यक्ति उस स्थान पर कम से कम दो वर्ष तक रहने वाला हो, तो वह स्थान उसके लिए मुक़र्र (हुक्मी वतन) माना जाएगा। इसलिए वहां उसकी नमाज़ पूरी होगी और उसके रोज़े सही होंगे। (स्पष्टीकरण: पहले दो महीनों में भी एहतियात करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस बात का इज्माली इल्म है कि वहां मुक़र्र होने की शर्तें या उस व्यक्ति के लिए, जिसका काम ही सफर में होता है, लागू होने वाली शर्तें पूरी हो रही हैं।)
दूसरी स्थिति: अगर वह व्यक्ति छह महीने से लेकर दो वर्ष से कम समय तक उस स्थान पर रहता है, तो एहतियात के आधार पर वह स्थान उसके लिए मुक़र्र (हुक्मी वतन) नहीं माना जाएगा। लेकिन उसकी नमाज़ पूरी होगी, यानी चार रकअत पढ़ेगा और उसके रोज़े सही होंगे।( स्पष्टीकरण: ऐसा इसलिए है क्योंकि इस मामले में मुक़र्र होने की शर्तों या उस व्यक्ति के लिए, जिसका काम सफर में होता है, लागू होने वाली शर्तों के पूरा होने का इज्माली इल्म है।)
तीसरी स्थिति: अगर वह व्यक्ति उस स्थान पर कम से कम तीन महीने और छह महीने से कम समय तक रहता है, तो उस स्थान को उसके लिए मुक़र्र नहीं माना जाएगा। लेकिन अधिक सफर करने वाला व्यक्ति होने की वजह से उसकी नमाज़ पूरी होगी, यानी चार रकअत पढ़ेगा और उसके रोज़े भी सही होंगे। जहां तक ऐसे लोगों की रास्ते में नमाज़ और रोज़े के हुक्म का संबंध है, तो इसकी भी कई स्थितियां हैं: पहली स्थिति: अगर वह महीने में एक से चार दिन तक आने-जाने का सफर करता है, तो रास्ते में उसकी नमाज़ क़स्र होगी, यानी चार रकअत वाली नमाज़ दो रकअत पढ़ेगा। दूसरी स्थिति: अगर वह महीने में पांच से चौदह दिन तक आने-जाने का सफर करता है, तो एहतियात के आधार पर वह नमाज़ को जमा करे, यानी नमाज़ पूरी भी पढ़े और क़स्र भी पढ़े। तीसरी स्थिति: अगर वह महीने में पंद्रह दिन या उससे अधिक आने-जाने का सफर करता है, तो उसकी नमाज़ पूरी होगी, यानी चार रकअत पढ़ेगा और उसका रोज़ा भी सही होगा।
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